अखाड़ों की सुरक्षा के भी अपने इंतजाम हैं। संत-महंतों की सुरक्षा हो या संपत्ति की देखरेख, इसके लिए पूरी फौज है। इनमें कोतवाल से लेकर झुंडी महंत की टोलियां शामिल हैं। त्रिशूल, भाला और खड्ग इनके हथियार हैं। शस्त्र चलाने से लेकर शास्त्रों की शिक्षा में ये पारंगत होते हैं। महाकुंभ में अखाड़ों के रमता पंचों के नगर प्रवेश के साथ कुंभ नगरी में इनका भी आगमन होता है। पेशवाई में सुरक्षा घेरा बनाकर चलते हैं और इष्टदेव एवं अखाड़ा के सर्वोच्च पदों पर आसीन संतों की सुरक्षा करते हैं। अखाड़ों की फौज का इतिहास मुगल काल से जुड़ा है। संतों के अनुसार, मुगलों ने हिंदू धार्मिक स्थलों को तोड़ा और हिंदुओं का दमन कर धर्मांतरण किया। सनातन धर्म की रक्षा के लिए अखाड़ों के संतों ने मुगलों के खिलाफ हथियार उठाए। इनमें नागा संन्यासियों की वीरता के किस्से इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। श्री निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी बताते हैं कि समय के साथ मुगलों का साम्राज्य तो खत्म हो गया, लेकिन अखाड़ों की फौज की परंपरा आज भी है। भले ही युद्ध नहीं होते हैं, लेकिन फौज अखाड़ों की संपत्ति और संतों की सुरक्षा करती है। हर अखाड़े में थानापति, कोतवाल और जिलेदार जैसे पद हैं।
हरिद्वार महाकुंभ 2021 : थानापति से लेकर कोतवाल, अखाड़ों की होती है अपनी फौज, तस्वीरें
निशांत खनी, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 03 Mar 2021 02:41 PM IST
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