महाकुंभ में आए संत दिगंबर दिवाकर भारती साढ़े चार साल से उर्द बाहु (बाएं हाथ) को ऊपर कर तपस्या में लीन हैं। उनका कहना है यह तपस्या आजीवन जारी रहेगी। एसएमजेएन कॉलेज में बनी श्री निरंजनी अखाड़े की अस्थायी छावनी में पहुंचे दिगंबर दिवाकर भारती ने कहा कि उन्होंने हिमालय में अलग-अलग स्थानों पर तपस्या की है। उत्तराखंड के नैनीताल और पश्चिम बंगाल के आसनसोल में भी तपस्या की है। पिछले एक साल से औरंगाबाद में तपस्या कर रहे हैं। 11 मार्च को होने वाले महाशिवरात्रि के शाही स्नान के लिए वह हरिद्वार पहुंचे हैं। उनका कहना है कि भगवान से लगाव ही मनुष्य का सबसे बड़ा कर्म है। भगवान की इच्छा से ही मनुष्य अपने शरीर पर नियंत्रण रख सकता है। वह पिछले छह साल से फलाहार पर हैं। प्रयागराज कुंभ में भी वह अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। वहीं कुंभ मेलों की पेशवाइयों और शाही स्नानों के समय साधु संतों के अखाड़ों के ऐश्वर्य दर्शन भी होता रहा है। मुगलकाल और ब्रिटिशकाल में देसी राजा-महाराजा कुंभ के अवसर पर सोने-चांदी, हीरे-मोती का जखीरा साधु-संतों को दान दिया करते थे।
हरिद्वार महाकुंभ 2021 : साढ़े चार साल से उर्द बाहु तपस्या में लीन हैं दिगंबर दिवाकर भारती, तस्वीरें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 03 Mar 2021 02:40 PM IST
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