बृहस्पतिवार 8 फरवरी बनभूलपुरा क्षेत्र में मलिक के बगीचे में अवैध मदरसा और धर्मस्थल हटाने गई पुलिस और प्रशासन की टीम का विरोध तो वहां मौजूद स्थानीय लोगों और महिलाओं की ओर से पहले ही शुरू हो चुका था लेकिन असल उपद्रव शाम को जेसीबी के अंदर जाने से शुरू हुआ।
Haldwani violence: जेसीबी पहुंचने के बाद शुरू हुआ असल उपद्रव..आठ फरवरी की दास्तां जानें महिला अधिकारी की जुबां
Haldwani violence:
सवाल- कितने पुलिसकर्मियों के साथ निकले?
जवाब- 700 पुलिसकर्मियों को लेकर निकली, जिनमें महिला अधिकारी, कर्मचारी भी शामिल थीं। इनमें 20 सब इंस्पेक्टर, 70 महिला कांस्टेबल शामिल रहीं।
सवाल- बड़ी कार्रवाई पर निकलने के लिए क्या पुलिस फोर्स के पास हथियार थे?
जवाब- लाठी-डंडे और बॉडी प्रोटेक्टर के अलावा और कुछ नहीं था।
सवाल- टीम कैसे बनभूलपुरा क्षेत्र में पहुंची?
जवाब- हम लोगों में कुछ वाहन से तो कुछ पैदल निकले।
सवाल- क्या मंजर देखने को मिला?
जवाब- करीब 4.30 बजे मंगलपड़ाव से होते हुए बनभूलपुरा पहुंचे तो वहां विरोध शुरू हो चुका था। जेसीबी आगे चल रही थी, जिसे उपद्रवियों ने घेरना शुरू कर दिया था। पुलिस बल ने लोगों को हटाया और आगे बढ़े।
सवाल- पत्थरबाजी किस समय शुरू हुई?
जवाब- मलिक के बगीचे में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ और पत्थरबाजी शुरू हो गई थी। लोगों ने छतों, गलियों से पत्थर फेंकने शुरू कर दिए थे। हालात यहां नहीं रुके, चारों तरफ से कांच, टयूबलाइट, ईंट-पत्थर के साथ पेट्रोल बम भी गिराए जाने लगे। ऐसा लगा जैसे युद्ध हो रहा हो।
सवाल- क्या पुलिस ने लोगों को समझाने का काम नहीं किया?
जवाब- कार्रवाई से पूर्व पुलिस और निगम की टीम लगातार लोगों को समझाते रही और शांति की अपील करती रही।
सवाल- पुलिस का प्लान क्या था?
जवाब- महिला कर्मचारी साथ में थे। अंधेरा होने से पहले फोर्स को बाहन निकालना जरूरी था लेकिन आगजनी और पत्थरबाजी के कारण मामला उलझ गया।
सवाल- कितने पुलिस कर्मियों को चोट लगी?
जवाब- 150 पुलिस कर्मचारियों को चोट लगी। उन्हें स्वयं पैरो में चोट लगी। उपद्रवियों ने निगम की जेसीबी तोड़ी और हमारे डायल-112 वाहन को जला दिया।
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