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पंकज सिंह हत्याकांड: जिगरी यार ही बन गए जान के दुश्मन, ऐसे किया दोस्ती का खौफनाक अंत
अपराध की राह पर चलते हुए वक्त के साथ हिस्ट्रीशीटर पंकज सिंह के दोस्त और दुश्मन बदलते चले गए। शुरू में जो दोस्त थे, वही दुश्मन बनते गए। कई साल पहले सार्वजनिक तौर पर अपराध का चोला उतारकर पंकज सिंह कारोबारी तो बन गया, लेकिन अपराधियों से खुद को अलग नहीं कर पाया। कत्ल में जिनके नाम सामने आए हैं, वे कभी पंकज के साथ साए की तरह चलते थे।
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- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, पंकज सिंह और जेल में बंद जितेंद्र उर्फ जित्ती, मुनीर उर्फ बब्बल, जयदीप आदि प्रापर्टी का कारोबार करते थे। मुनीर उर्फ बब्बल से एक प्रापर्टी को लेकर रिश्तों में ऐसी कड़वाहट आई कि अपने ही उसकी जान के दुश्मन बन गए। आरोप है कि छह मार्च 2010 को इन लोगाें ने मुनीर की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी।
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- फोटो : अमर उजाला
मुनीर की हत्या उस समय हुई जब वह भांजी को छोड़ने स्कूल जा रहा था। हत्या में जितेंद्र, पंकज सिंह और जयदीप को जेल जाना पड़ा था। कई माह बाद पंकज जमानत पर बाहर आ गया था। एसपी सिटी श्वेता चौबे की मानें तो विवादित प्रापर्टी में पंकज और उसके साथियों का खासा दखल था। 2002 में पहली बार उसका नाम पुलिस रिकार्ड में आया था।
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- फोटो : अमर उजाला
तब रायपुर थाने में घर में घुसकर मारपीट और धमकी देने के आरोप का मुकदमा दर्ज हुआ था। पटेलनगर में 2011 में एक अन्य हत्या में पंकज सिंह नामजद हुआ था। 2017 में बलवे के मुकदमे के बाद पंकज का नाम किसी दूसरे मामले में नहीं आया। अब हत्या में जिन लोगों का नाम आ रहा है, वो उसके करीबी थे। उनकी दोस्ती कब और क्यों दुश्मनी में बदल गई, पुलिस इसका पता लगा रही है।
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- फोटो : अमर उजाला
नेहरू कालोनी पुलिस हिस्ट्रीशीटर होने के कारण हर माह पंकज को थाने बुलाती थी। एसओ दिलबर नेगी ने बताया कि जनवरी माह में पंकज सिंह थाने आया था। अक्सर चीता मोबाइल भी रिंग रोड स्थित उसके गेस्ट हाउस पर पहुंचकर पंकज सिंह की निगरानी करती थी। अगले सप्ताह पंकज को फिर थाने आना था
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