एक तरफ प्रधानमंत्री ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत बेटियों को शिक्षित और सशक्त बनाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, कलियर में एक शख्स ने द्वेषवश महज तीन माह की अपनी बेटी की हत्या कर दी। उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने ये खतरनाक कदम इसलिए उठाया है कि उसकी पत्नी सौतेले बच्चों से दुर्व्यवहार करती थी। पत्नी से बदला लेने के लिए व्यक्ति ने तनाव में आकर उसने मासूम को गंगनहर में फेंक दिया।
पंद्रह दिन पूर्व बेड़पुर निवासी शहजाद ने अपनी साढ़े तीन माह की नवजात बेटी को गंगनहर में फेंक दिया था। इसके बाद से उसकी मां मासूम के बारे में शहजाद से पूछताछ करती आ रही थी। शहजाद भी कभी बच्ची को रिश्तेदारी में गोद देने की बात करता तो कभी किसी बाबा को गोद देने की कहानी सुनाता रहा। करीब 12 दिन बाद पत्नी को शक हुआ तो उसने अपने परिजनों को मामले की जानकारी दी। महिला के भाई ने पहले अपने जीजा से पूछताछ की, मगर कोई ठीक जवाब नहीं देने पर उसने पुलिस से मामले की शिकायत की।
पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो शहजाद का घिनौना सच सामने आया। इसमें भी सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि शहजाद ने बच्ची को मारने का जो कारण बताया, वह बेहद संकुचित मानसिकता वाला था। पुलिस की पूछताछ में शहजाद ने बताया कि उसने मासूम की महज इसलिए हत्या कर दी कि उसकी पत्नी पहली पत्नी के बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार करती थी। इसे लेकर आए दिन घर में कहासुनी होती रहती थी। इसके चलते उसने बच्ची को मौत के घाट उतार दिया।
पुलिस के अनुसार पंद्रह दिन पहले आरोपी बच्ची को लेकर डॉक्टर के पास गया था। इसके बाद जब वह बच्ची के बैगर घर पहुंचा तो उसने पत्नी को बताया था कि बच्ची की हालत गंभीर होने के कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके बाद बच्ची को रिश्तेदार ने गोद लेने और एक बाबा को देने की कहानियों से पुलिस और पत्नी को गुमराह करता रहा।
जो व्यक्ति पढ़ लिखकर स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षा ग्रहण कर रहा है, उसने अपनी ही बच्ची की जिन्दगी छीन ली। पुलिस ने बताया कि हत्यारोपी पिता एमए करने के साथ ही पॉलीटेक्निक का डिप्लोमा भी कर चुका है। यही नहीं प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम डीएलएड की भी पढ़ाई कर रहा है। आरोपी ने भावुक होकर पुलिस को बताया कि उसका सपना स्कूल में छोटे बच्चों को पढ़ाने का था।