उत्तराखंड के रुड़की से दिल्ली कूच कर रहे किसानों को पुलिस ने नारसन बॉर्डर पर ही रोक लिया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। काफी जद्दोजहद के बाद किसानों ने एकबारगी तो बैरिकेडिंग हटा दी और यूपी की सीमा की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने पीछा कर उन्हें रोक लिया। इसके बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामी बंसल मौके पर पहुंचीं और किसानों को समझाया। इस पर किसानों ने उन्हें अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा और लौट आए।
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रुड़की से दिल्ली कूच के लिए निकले किसानों को रोकती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार सुबह करीब 11.30 बजे भारतीय किसान यूनियन (तोमर) के जिलाध्यक्ष विकेश बालियान ट्रैक्टरों पर सवार कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली रवाना होने के लिए नारसन बॉर्डर पहुंचे। कुछ देर बाद ही कई गाड़ियों के साथ भारतीय किसान यूनियन (रोड़) के प्रदेश उपाध्यक्ष पद्म सिंह रोड़ भी किसानों के साथ बॉर्डर पर पहुंच गए।
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दिल्ली कूच के लिए निकले किसानों को रोकती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, लेकिन किसान दिल्ली जाने की जिद पर अड़े रहे। इसी बीच किसानों ने बैरिकेडिंग हटाकर ट्रैक्टर निकालने शुरू कर दिए और यूपी की ओर बढ़ने लगे, लेकिन सीओ मंगलौर अभय सिंह ने समझा बुझाकर किसानों को रोका।
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दिल्ली कूच के लिए निकले किसान
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान विकेश बालियान ने कहा कि किसानों की मांग केंद्र सरकार को माननी ही होगी। पूरे देश का अन्नदाता दिल्ली में बैठी सरकार की मनमनी नहीं सहेगा। उचित मूल्य से कम दाम पर किसान फसल नहीं बेचेगा। व्यापारियों को भी कालाबाजारी रोकने के लिए एक निश्चित मूल्य रखना होगा।
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दिल्ली कूच के लिए निकले किसान
- फोटो : अमर उजाला
पद्म सिंह रोड़ ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसान विरोधी है। तारीख पर तारीख देकर सरकार किसानों का इम्तिहान ले रही है। सब्र का बांध टूट गया तो सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। भाकियू (तोमर) के प्रदेश अध्यक्ष सोमदत्त शर्मा ने कहा कि हरियाणा और पंजाब का किसान पूरी तरह से सड़कों पर आ गया है और सरकार उन पर लाठियां चला रही है, लेकिन किसान दिल्ली जाकर ही मानेंगे।