दो दिन पहले जिन हाथों से मां-बाप की अर्थी को कंधा दिया उन्हीं हाथों से जब बाबुल के दिए गहने पहने तो बेटी की आंखों में जैसे आंसुओं सैलाब उमड़ पड़ा...
रुड़की के भगवानपुर क्षेत्र के लव्वा गांव में 27 अप्रैल को राजसिंह के परिवार में दस सालों से रह रहे प्रताप सिंह ठाकुर ने राज सिंह सैनी उसकी पत्नी बबली और बेटे प्रदीप की फरसे काटकर निर्मम हत्या कर दी थी। मानसी की शादी 30 अप्रैल को तय थी, लेकिन इस बीच यह भीषण खूनी खेल हो गया। लग रहा था कि शादी कैंसिल हो जाएगी, लेकिन गांव के लोगों ने मिल जुलकर ऐसा नहीं होने दिया।
बाबुल के दिए जेवर को बिटिया ने पहना तो मानो आसूओं का सैलाब उमड़ पड़ा। गम और खुशी के माहौल में बिटिया के साथ रिश्तेदारों के अलावा समूचा गांव खड़ा था। ग्रामीणों ने बताया कि राजसिंह ने अपनी बेटिया का दहेज का सामान पहले ही ससुराल भिजवा दिया था। जेवर आदि की भी खरीदारी कर ली थी।
सोमवार को शादी के समय जब मानसी ने बाबुल के दिए जेवरों को पहना था तो वह खुद को रोने से नहीं रोक पाई। जब विदाई हुई तो भाई अजय के गले से लगकर जीभरकर रोई। ताऊ सतपाल और अन्य रिश्तेदारों से विदाई लेते समय मानसी के दुखों का कोई पारावार नहीं दिखाई पड़ रहा था। विदाई के समय हर किसी की आंखों में आसूं थे।
गांव और आसपास के लोगों ने बारात का स्वागत किया। करीब 2 बजे शादी की रस्म अदा होनी शुरू हुई। इस दौरान माहौल गमगनी नजर आया। हर कोई भावुक हो गया। रिश्तेदारों तथा ग्रामीणों ने नम आंखों से डोली को विदा किया। सूत्रों की मानें तो सोमवार को ससुराल जाने के बाद भी मानसी सिर्फ रोती ही रही। मां बाप की याद उसे हर समय सता रही है।