लालपुल के पास हुए हादसे से चंद सेकेंड पहले सब कुछ ठीक था। सुबह से खड़े मजदूर इंतजार कर रहे थे कि कोई आए और उनको मजदूरी पर ले जाए लेकिन 11 बजे बेकाबू सिटी बस ने उनको कुचल दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ऐसा लगा जैसे काल बनकर सिटी बस ने मजदूरों की जिंदगी छीनने के लिए झपट्टा मारा हो। लालपुल पर छह-सात बजे से ही मजदूरों की भीड़ लग जाती है। जिनको मजदूर या मिस्त्री की जरूरत होती है वह यहां आता है दिहाड़ी तय करके अपने साथ ले जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ज्यादातर मजदूर चले गए थे और चंद मजदूर ही दिहाड़ी की आस में यहां थे।
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देहरादून में हादसा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लोगों का कहना है कि बस की रफ्तार इतनी तेज थी कि मजदूरों को बचने का मौका भी नहीं मिला। जिस जगह पर यह हादसा हुआ वहां 250 के आसपास मजदूर होते हैं। गनीमत यह रही कि हादसा करीब 11 बजे हुआ। यदि हादसा सुबह होता तो स्थिति और भयानक हो सकती थी।
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लालपुल पर खून से लतपथ और दर्द से चीख पुकार सुनकर भी कई वाहन चालकों का दिल नहीं पसीजा। हादसे के बाद घटनास्थल पर जख्मी पड़े मजदूरों को अस्पताल पहुंचाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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एंबुलेंस न आने पर कई वाहनों को रोका गया तो घायलों को देखकर वाहन चालक रुकने को ही तैयार नहीं हुए। इसके बाद सख्ती कर पुलिस ने ई-रिक्शा को रुकवाया और घायलों को अस्पताल भिजवाया। सोमवार को हुए हादसे में मजदूर इतनी बुरी तरह जख्मी हुए कि हर कोई सहम गया।
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हादसे के बाद काफी देर तक मजदूर चीखते हुए घटनास्थल पर ही पड़े रहे। सड़कों पर खून था और मजदूर दर्द से कराह रहे थे। एंबुलेंस का इंतजार करने के बाद जब पुलिस और स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल भेजने के लिए वाहनों को रुकवाया तो कई वाहन चालकों ने मना कर दिया। ये देख लोगों में रोष पनप गया।