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Ram Mandir: 1000 साल तक रामलला के घर का नहीं होगा बाल भी बांका, भवन का भार उठाएंगे हाथी-घोड़े, जानें खास बातें

Tue, 02 Jan 2024 10:56 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 02 Jan 2024 10:56 PM IST
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Ayodhya Ram Mandir pran Pratishtha: cbri roorkee made temple with Unique Technique Know Interesting Facts
राम मंदिर गर्भगृह - फोटो : X/@ChampatRaiVHP

केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की की ओर से अयोध्या में बनाए जा रहे श्रीराम मंदिर के भवन का डिजाइन ऐसी खास कला और तकनीक के इस्तेमाल से तैयार किया गया है, जिससे कम से एक हजार साल तक इसका बाल भी बांका नहीं हो सकेगा। पूरे भवन की प्रतिपल हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए नींव, कॉलम और रिटेनिंग वॉल में सेंसर लगाए गए हैं। मंदिर के विशालकाय भवन की खासियत यह भी है कि इसमें कहीं भी सरिया नहीं लगा है।



सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार ने बताया कि मंदिर के डिजाइन में तकनीक के साथ भारतीय संस्कृति का भी समावेश किया गया है। मंदिर में रामलला की प्रदक्षिणा के साथ ही पांच जगह से प्रवेश किया जा सकता है। वैज्ञानिक डाॅ. देवदत्त घोष ने बताया कि शुरुआत में अहमदाबाद की एक कंपनी ने संस्थान को श्रीराम मंदिर का मॉडल सौंपा था जिसका अध्ययन किया गया।

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उन्होंने कहा कि बिना सरियों के इस्तेमाल के मंदिर का आकार डिजाइन के लिहाज से चुनौती था। इसके चलते टेस्टिंग और कंप्यूटर में मॉडलिंग करने के बाद डिजाइन में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। कई स्थानों पर बड़े कॉलम के साथ दो छोटे-छोटे कॉलम दिए गए। फाइनल डिजाइन से पहले कंप्यूटर पर 50 मॉडल तैयार किए गए जिसमें छह माह का समय लगा। पूरे भवन में कोई सरिया नहीं लगा है। यहां तक की सीढि़यों में भी सरिया नहीं लगा है। मंदिर की ऊंचाई 161 फीट है। पूरे मंदिर में कॉलम को एक के ऊपर एक पत्थर को रखकर इंटरलॉकिंग सिस्टम से निर्मित किया गया है। बीम में एक ही पत्थर का इस्तेमाल किया गया है।

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मंदिर के बारे में जानकारी देते सीबीआरआई रुड़की के वैज्ञानिक - फोटो : अमर उजाला

भवन के भार संतुलन के लिए स्थापित किए गए हैं हाथी और घोड़े
मंदिर का भवन कलाकृति का भी बेजोड़ नमूना होगा। पूरे भवन में भार को संतुलित करने के लिए जगह-जगह भारी भरकम हाथी और घोड़े स्थापित किए गए हैं। वैज्ञानिक डॉ. देवदत्त घोष ने बताया कि भवन पूरी तरह भूकंपरोधी है। साथ ही इसे किसी भी प्राकृतिक आपदा की आशंका से दोगुनी क्षमता सहने के हिसाब से तैयार किया गया है।

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राम मंदिर का मॉडल - फोटो : अमर उजाला

120 मीटर गहराई तक लिए गए मिट्टी के सैंपल
वैज्ञानिक डाॅ. मनोजीत सामंता ने बताया कि पूरे भवन में रियल टाइम मॉनिटरिंग सेंसर लगाए गए हैं जो हर पल भवन की सेहत और उसमें बदलाव की जानकारी देंगे। कहा कि श्रीराम मंदिर की बुनियाद बेहद मजबूत है। 60 मीटर से लेकर 120 तक गड्ढा करने के बाद पक्की मिट्टी के सैंपल की जांच के बाद डेढ़ मीटर मोटा स्ट्रक्चरल डिजाइन तैयार किया गया है।

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राम मंदिर का मॉडल - फोटो : अमर उजाला

सूर्यदेव लगाएंगे माथे पर तिलक, सीबीआरआई ने लगाए शीशे
प्रोजेक्ट सूर्य तिलक को भी सीबीआरआई ने अंजाम दिया है। इसके तहत मंदिर के भीतर विराजमान रामलला के मस्तक पर रामनवमी के दिन सूर्य की किरणें दोपहर 12 बजकर 04 मिनट पर 20 सेकेंड के लिए विराजमान रहेंगी। वैज्ञानिक डाॅ. एसके पाणिग्रही ने बताया कि मंदिर के ऊपर की मंजिल पर शीशा लगा है और इसी तरह फाउंडेशन में लगा है। ये सामने से आने वाली सूर्य की किरणों को बुनियाद के शीशे पर रिफलेक्ट करेगा और यहां से सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी। इसके लिए गियर मैकेनिज्म का प्रयोग किया गया है। इसके जरिए रामनवमी को शीशे की दिशा को खास तरीके से फिक्स किया जाएगा।

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राम मंदिर का मॉडल - फोटो : अमर उजाला

जिस टेंट में विराजे थे रामलला, उसे भी संस्थान ने बनाया था
सीबीआरआई रुड़की तीन दशक से अयोध्या में विराजमान रामलला की सेवा में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराता रहा है। वैज्ञानिक डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि विराजमान लला के ऊपर के तिरपाल को आग और पानी व बंदरों से सुरक्षित रखने के लिए संस्थान में बनाया गया। 400 वर्ग मीटर के तिरपाल पर विशेष प्रकार के केमिकल की कोटिंग कर 1994 में रामलाला के ऊपर स्थापित किया गया। इसके बाद 2003 और फिर 2015 में नया तिरपाल बनाकर भेजा गया।

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