उत्तराखंड के काशीपुर में अमर उजाला भविष्य ज्योति सम्मान समारोह में उत्तराखंड बोर्ड और सीबीएसई के 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में जिलास्तर और स्कूल स्तर पर अव्वल रहे 232 मेधावियों को मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर मेधावियों के चेहरे खिल गए।
अमर उजाला भविष्य ज्योति सम्मान 2019: सम्मान पाकर आत्मविश्वास से भर गए होनहार, मेडल देख खिले चेहरे
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कुंडेश्वरी रोड स्थित साईं पब्लिक स्कूल में बृहस्पतिवार को आयोजित सम्मान समारोह का शुभारंभ चंपावत विधायक कैलाश गहतोड़ी, स्कूल के प्रबंध निदेशक शशांक गहतोड़ी, स्कूल के प्रधानाचार्य आशुतोष रस्तोगी, अमर उजाला के यूनिट हेड डीडी जोशी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में जिला और स्कूल टॉपरों को अमर उजाला भविष्य ज्योति मेडल पहनाकर और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान अतिथियों ने मेधावियों को जीवन में सही दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
विधायक चंपावत कैलाश गहतोड़ी ने कहा कि आप लोग अपने विद्यालयों में टॉपर हैं, इसलिए सम्मान के पात्र हैं। आपको एक के बाद एक मंजिल को पार करना है। जीवन में टास्क बनाकर अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर कोशिश करें। आपको कैसे और किस दिशा में प्रयास करने हैं, इसके लिए अपना मन बना लें। हम दुनिया में आए हैं तो अपनी क्षमता के अनुसार समाज और देश के प्रति दायित्वों में अपनी सहभागिता करें। मैने व्यक्तिगत जीवन में भी अनुभव किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ मैंने जो पाना चाहा, उसे हासिल कर ही लिया।
अपर पुलिस अधीक्षक, काशीपुर डॉ. जगदीश चंद्र, ने कहा कि मेधावियों का सम्मान उनकी मेधा के लिए किया जाता है। अमर उजाला की यह सराहनीय पहल है। सफलता का कोई एक मंत्र नहीं होता है। थॉमस एडिशन के उदाहरण के माध्यम से बार-बार प्रयास करने पर ही सफलता हासिल होती है, इस बात को विद्यार्थी अपने जीवन में आत्मसात करें। सफलता पाने के लिए विद्यार्थी को कठिन परिश्रम करना बहुत जरूरी है। सपने जरूर देखें लेकिन ऐसे सपने देखे जो आपको सोने नहीं दें। जिस क्षेत्र में जाना चाहते हैं, लक्ष्य बनाकर उसी में रम जाना चाहिए।
खंड शिक्षाधिकारी, काशीपुर आरएस नेगी ने कहा कि मन में अगर कुछ करने का जुनून हो तो गरीबी-अमीरी कोई मायने नहीं रखती है। दृढ़ निश्चय बनाकर कठिन परिश्रम करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। बच्चों को आगे बढ़ने के लिए विद्यालयों में मोटीवेशनल कक्षाएं होनी चाहिए। ताकि बच्चों को भविष्य में बेहतर करने के लिए सही मार्ग चुनने में सहायता मिल सके। मैंने जीवन में कुछ बड़ा करने के लिए गृह मंत्रालय में दो वर्ष नौकरी करके छोड़ दी। शिक्षा विभाग में सात वर्ष तक बच्चों को पढ़ाने के बाद भी संतुष्ट नहीं हुआ। खंड शिक्षाधिकारी बनने के बाद ब्लॉक में क्षेत्र के अधिकांश बच्चों के जीवन में रोशनी भरने के लिए उनको मोटीवेट कर रहा हूं। लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ते रहने से सफलता हासिल होती है।