टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ खुद के खिलाफ हितों के टकराव मामले में अपना पक्ष रखने के लिए बीसीसीआई के एथिक्स ऑफिसर डीके जैन के समक्ष पेश हुए। प्रशासकों की समिति (सीओए) ने इस मसले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का उदाहरण देकर इस मामले को ठंडा करने की कोशिश की।
बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर पीटीआई को बताया, 'सीओए प्रमुख ने सुनवाई से पहले एक नोट लिखा है कि उन्हें लगता है कि अगर द्रविड़ ने अवकाश लिया है तो उनका हितों का टकराव नहीं है। उन्होंने आरबीआई के पूर्व गवर्नर राजन का उदाहरण दिया जिन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में अपनी शिक्षक की भूमिका से अवकाश लिया था।'
उन्होंने कहा, 'इसके अलावा अरविंद पनगढ़िया का भी उदाहरण दिया गया। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष भी कोलंबिया विश्वविद्यालय से अवकाश लेकर आए थे। इन दोनों ही मामलों में उक्त व्यक्ति बेहद संवेदनशील सरकारी पदों पर थे और अपने पिछले नियोक्ता से कोई वेतन नहीं ले रहे थे।'
अधिकारी ने कहा, 'सीओए का मानना है कि अगर द्रविड़ ने घोषित किया है और इंडिया सीमेंट्स से कोई वेतन नहीं ले रहा तो उनका हितों का टकराव नहीं है।'
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राहुल द्रविड़
- फोटो : File
ये था पूरा मामला?
मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ के आजीवन सदस्य संजीव गुप्ता ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था कि द्रविड़ ने राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) का क्रिकेट निदेशक पद संभालने से पहले इंडिया सीमेंट्स (आईपीएल फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिक) से 'अवकाश' लिया है और अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया।