‘मोदी सेब’ या ‘मॉडी सेब’ के नाम पर बागवानों से कहीं धोखा तो नहीं हो गया। इटली से लाए गए इस किस्म के सेब को लेकर बागवान असमंजस में हैं। उनका दावा है कि इटली के इस सेब के पौधों पर रेड डिलिशियस की तरह धारीदार फल उग रहे हैं, जबकि मोदी सेब धारीदार नहीं होता है।
ये गाला और लिबर्टी किस्मेें मिलाकर तैयार की गई हाईब्रिड किस्म होती है। मोदी किस्म के सेब के ये पौधे इटली से डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी ने मंगवाए थे। बागवानी विभाग के माध्यम से ही पौधे बागवानों ने खरीदे। प्रभावित बागवान इस मामले को नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के ध्यान में ला चुके हैं।
अब राज्य बागवानी विभाग के निदेशक से भी इसकी शिकायत करेंगे। मोदी सेब का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कोई संबंध नहीं है। इस किस्म को इटली में तैयार किया गया। बताया जाता है कि इस किस्म का नामकरण कलाकार एमेडियो मोदीग्लियानी के नाम से किया गया। जो मोदी या मॉडी नाम से मशहूर थे।
इसे कोनसोरजियो इटेलियानो विवेस्टी (सीआईवी) संस्था ने वर्ष 2007 में तैयार किया। इसके लिए मशहूर लिबर्टी और गाला किस्मों को क्रॉस किया गया। सेब की ये किस्म इटली, तुर्की, न्यूजीलैंड और चिली में उगाई जा रही है। भारत के लिए भी इसका आयात हो रहा है। अब इसे हिमाचल में उगाने की तैयारी थी।
कोटखाई तहसील के देवगढ़ गांव के बागवान संजय शर्मा ने कहा कि नौणी में एक ट्रेनिंग के बाद पिछले साल फेदर्ड मोदी सेब 30 बागवानों को बेचे गए। मगर अब जब इसमें सैंपल आए हैं, वे इस सेब के नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनके अलावा कई अन्य बागवानों के यहां भी ऐसा ही हुआ है। वे खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। इसी तरह से कोटखाई तहसील के बखोल गांव के सेब बागवान संजीव चौहान ने कहा है कि बागवानी विभाग के माध्यम से उन्होंने मोदी सेब किस्म के पेड़ खरीदे थे।