{"_id":"6aa95add652504c5df0bf016","slug":"preparations-underway-to-demolish-a-ward-office-built-on-forest-land-without-an-approved-plan-shimla-news-c-19-sml1002-787133-2026-09-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: बिना नक्शे के वन भूमि पर बने \nवार्ड दफ्तर को गिराने की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: बिना नक्शे के वन भूमि पर बने वार्ड दफ्तर को गिराने की तैयारी
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने दिया है भवन गिराने का आदेश
पहले भी विवादों में रहा है शिमल नगर निगम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के संजौली में वन भूमि पर बिना नक्शे के बनाए गए अपने ही वार्ड दफ्तर को अब नगर निगम को गिराना होगा। शहर में निगम का यह पहला परिसर नहीं है, जिसके बिना नक्शे के निर्माण को लेकर नगर निगम सवालों के घेरे में आया है। इससे पहले भी निगम की ओर से बनाए गए कई परिसरों पर सवाल उठ चुके हैं। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने नगर निगम को वार्ड दफ्तर गिराने का आदेश दिया है। एमसी जल्द इस भवन को गिरा सकता है।
नगर निगम एक ओर शहर में अवैध निर्माण करने वालों पर सख्ती कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खुद नियमों को ताक पर रखकर निर्माण करने के आरोपों में घिरा है। बीते साल नगर निगम ने शहर में शराब के ठेके खोलने के लिए उपनगरों में कई दुकानें खड़ी कर दी थीं। आरोप है कि इनमें से ज्यादातर दुकानें बिना नक्शे के बनाई गईं। खास बात यह है कि कनलोग और समरहिल में तो वन भूमि पर ही निर्माण कर दिया था। सवाल उठने पर समरहिल में काम रोक दिया गया।
लक्कड़ बाजार में बस अड्डे के पास निगम ने एक और ठेका बनाने का काम शुरू किया था जिसे पार्षद सरोज ठाकुर ने रुकवा दिया था। शहर में स्टील से बनाई गईं कई पार्किंग भी बिना नक्शे के खड़ी करने के आरोप लगते रहे हैं। आजीविका भवन के नक्शे और इसकी कंप्लीशन को लेकर भी निगम जांच बिठा चुका है। वार्डों में भी कई छोटे परिसरों के निर्माण को लेकर सवाल उठ चुके हैं। इस पर निगम का तर्क है कि शराब के ठेके अस्थायी ढांचे हैं और इन्हें कभी भी हटाया जा सकता है। हालांकि दूसरी ओर निगम ने इन ढांचों में अब दुकानें खोल दी हैं।
विज्ञापन
आयुक्त ने अधिकारियों के साथ की बैठक
नगर निगम आयुक्त सचिन कंवल ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें संजौली के इंजनघर में बने वार्ड दफ्तर को गिराने के आदेशों को लेकर चर्चा की गई। नगर निगम जल्द इस निर्माण को खुद गिरा सकता है। फिलहाल कोर्ट के आदेशों का अध्ययन किया जा रहा है।
नगर निगम आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि कोर्ट के आदेशों का अध्ययन किया जा रहा है। इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक भी की गई है। भविष्य में इस तरह का निर्माण न हो, इसे लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
विज्ञापन
पहले भी विवादों में रहा है शिमल नगर निगम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के संजौली में वन भूमि पर बिना नक्शे के बनाए गए अपने ही वार्ड दफ्तर को अब नगर निगम को गिराना होगा। शहर में निगम का यह पहला परिसर नहीं है, जिसके बिना नक्शे के निर्माण को लेकर नगर निगम सवालों के घेरे में आया है। इससे पहले भी निगम की ओर से बनाए गए कई परिसरों पर सवाल उठ चुके हैं। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने नगर निगम को वार्ड दफ्तर गिराने का आदेश दिया है। एमसी जल्द इस भवन को गिरा सकता है।
नगर निगम एक ओर शहर में अवैध निर्माण करने वालों पर सख्ती कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खुद नियमों को ताक पर रखकर निर्माण करने के आरोपों में घिरा है। बीते साल नगर निगम ने शहर में शराब के ठेके खोलने के लिए उपनगरों में कई दुकानें खड़ी कर दी थीं। आरोप है कि इनमें से ज्यादातर दुकानें बिना नक्शे के बनाई गईं। खास बात यह है कि कनलोग और समरहिल में तो वन भूमि पर ही निर्माण कर दिया था। सवाल उठने पर समरहिल में काम रोक दिया गया।
विज्ञापन
लक्कड़ बाजार में बस अड्डे के पास निगम ने एक और ठेका बनाने का काम शुरू किया था जिसे पार्षद सरोज ठाकुर ने रुकवा दिया था। शहर में स्टील से बनाई गईं कई पार्किंग भी बिना नक्शे के खड़ी करने के आरोप लगते रहे हैं। आजीविका भवन के नक्शे और इसकी कंप्लीशन को लेकर भी निगम जांच बिठा चुका है। वार्डों में भी कई छोटे परिसरों के निर्माण को लेकर सवाल उठ चुके हैं। इस पर निगम का तर्क है कि शराब के ठेके अस्थायी ढांचे हैं और इन्हें कभी भी हटाया जा सकता है। हालांकि दूसरी ओर निगम ने इन ढांचों में अब दुकानें खोल दी हैं।
विज्ञापन
आयुक्त ने अधिकारियों के साथ की बैठक
नगर निगम आयुक्त सचिन कंवल ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें संजौली के इंजनघर में बने वार्ड दफ्तर को गिराने के आदेशों को लेकर चर्चा की गई। नगर निगम जल्द इस निर्माण को खुद गिरा सकता है। फिलहाल कोर्ट के आदेशों का अध्ययन किया जा रहा है।
नगर निगम आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि कोर्ट के आदेशों का अध्ययन किया जा रहा है। इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक भी की गई है। भविष्य में इस तरह का निर्माण न हो, इसे लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।