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योगी ने दिलाई थी चित्रकूट वासियों को त्रेतायुग की याद, उपचुनाव में लोगों ने दिखाया कलयुगी आइना

Tue, 14 Nov 2017 01:18 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 14 Nov 2017 01:18 PM IST
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BJP is defeated in by election in chitrakoot
डेमो पिक
दीपावली पर योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट में भव्य आयोजन करवाया था। जिसके बाद ये कहा जा रहा थी कि योगी ने साक्षात् त्रेतायुग की याद दिला दी। लेकिन उपचुनाव के बाद लोगों ने कलियुगी आइना दिखाने वाला परिणाम दिया। माना जा रहा है आने वाले निकाय चुनावों पर भी इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।


यूपी से लेकर मप्र तक भाजपा सरकार लगातार रामराज्य लाने की बात करते हुए दोनों प्रांत के मुख्यमंत्रियों ने काम तो बहुत किए लेकिन भगवान राम की कर्मस्थली वाले विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा को मिली करारी हार का संदेश बहुत दूर तक जाएगा। भाजपाई इसके लिए तमाम बहाने बनाएंगे लेकिन यह हार काफी कुछ कहती है।
BJP is defeated in by election in chitrakoot
योगी आदित्यनाथ
दिग्गज भाजपाइयों का कहना है कि इससे सबक सीखने की भी जरूरत है। वहीं कांग्रेस की परंपरागत वाली सीट पर बेहद दबाव के बीच मिली यह जीत मानों पूरे मप्र की कांग्रेस को संजीवनी दे गई है। उत्साहित कांग्रेसी तो यह भी कहते हैं कि यह जीत भाजपा की ओवर कांफिडेंस और बड़बोलेपन के कारण मिली है। पार्टी उस क्षेत्र (तुर्रा)से हारी जहां उनके सीएम ने रात गुजारी और कई आदिवासी लोगों के घर में खाना खाया था।  

धर्मनगरी में हुए विधानसभा के उपचुनाव मेें अतिविश्वास ने भाजपा की नइया डुबो दी। वहीं यह भी कहा जा रहा कि प्रत्याशी के चयन में भाजपा धोखा खा गई। जिससे भाजपा को करारी हार का स्वाद चखना पड़ा। विधानसभा के उप चुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चित्रकूट के विकास के लिए कई घोषणाएं की थी। इसके अलावा परिक्रमा लगाने के साथ ही साधू संतों से मिले थे। जिससे भाजपा को लगा कि हिंदुत्वादी विचारधारा के आधार पर चुनाव जीत जाएंगे।
BJP is defeated in by election in chitrakoot
शिवराज सिंह चौहान
लेकिन चुनाव के पहले क्षेत्र का विकास न कराने व प्रत्याशी का सही चयन ठीक से नहीं कर पाई। कई भाजपा के कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस सीट से भाजपा की एक बार मात्र जीत हुई थी। जिसमें गहरवार जीते थे। इस बार उनको टिकट नहीं दिया गया जिससे भाजपा की गणित बिगड़ गई।
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प्रमाण पत्र लेते निलांशू चतुर्वेदी - फोटो : अमर उजाला
इस क्षेत्र से कई बार कांग्रेस के विधायक प्रेेम सिंह रहे। उनके निधन होने पर ही विधानसभा के उप चुनाव हुए है। जिससे कहा कि उनके निधन होने से लहर का भी फायदा कांग्रेंस को हुआ है। भाजपा ने कांग्रेस के दिवंगत विधायक के परिजनों को पार्टी में शामिल कराया था लेकिन कुछ दिनों बाद वह भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन में बेहद सावधानी बरती। नीलांशु इंजीनियर हैं। हालांकि वह इंजीनियरिंग न कर समाजसेवा कर रहे हैं। धर्मनगरी क्षेत्र में लगातार वह और उनकी बहन नगर पंचायत अध्यक्ष हैं। उनका व्यक्तित्व और भाजपा से नाराजगी का लाभ कांग्रेस को मिला।
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