रियो ओलंपिक मेडलिस्ट धाकड़ पहलवान साक्षी मलिक ने ऐसी बात कह दी है कि देशवासियों को बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगेगी, जानिए क्या बोलीं।
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Sakshi Malik In Chandigarh
मंगलवार को चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आई साक्षी मलिक एशियन चैम्पियनशिप के फाइनल में जापानी खिलाड़ी से हार गई थीं और सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा। इस बारे में एक सवाल पूछे जाने पर साक्षी ने कहा कि जापानी पहलवानों को हराना नामुमकिन है। इस जन्म में तो ये संभव ही नहीं, इसके लिए अगला जन्म लेना पड़ेगा।
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साक्षी मलिक ने कहा कि मेरे साथ साथ विनेश फोगाट और दिव्या ककरान भी एशियाई चैंपियनशिप में अपने अपने भार वर्गों के फाइनल में जापानी पहलवानों से हार गई थीं और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था। मुझे रियो ओलिंपिक में 63 किग्रा में गोल्ड मेडल जीतने वालीं रिसाको कवाई ने साक्षी को 60 किग्रा के फाइनल में आसानी से हराया था।
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रियो खेलों की एक और चैंपियन सारा दोशो ने दिव्या ककरान को 69 किग्रा भार वर्ग में हराया। साक्षी और दिव्या कोई भी छह मिनट तक नहीं टिक पाईं। विनेश ने साई नांजो का कुछ देर मुकाबला किया लेकिन आखिर में उन्हें भी हार ही मिली। इसकी वजह है जापानी पहलवान कौशल और तकनीक के मामले में हमसे कहीं बेहतर हैं। वे बेहद चुस्त और मैट पर काफी तेज होती हैं। हम उनकी तेजी की बराबरी नहीं कर पाते हैं।
साक्षी मलिक ने कहा कि मेरे लिए कुश्ती पूजा करने जैसा है। मैं आज कुछ भी हूं, इस खेल की वजह से हूं। इसने मुझे सिखाया कि सफलता के लिए कोई शार्टकट नहीं होता है। मेरा अभ्यास चल रहा है। मैं आगे भी सुधार करने की कोशिश करुंगी क्योंकि आप सीखना कभी बंद नहीं करते। विवाह के बाद भी कुछ नहीं बदला है और उन्होंने कुश्ती जारी रखी है और जारी रहेगी।