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मुंह खोलकर सोता है बच्चा तो जानलेवा हो सकता है, सावधान हो जाएं मां-बाप और ऐसे करें बचाव

Fri, 13 Mar 2020 03:19 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 13 Mar 2020 03:19 PM IST
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World Sleep Day, Be Alert Parents from Obstructive Sleep Apnea
Sleeping Baby
13 मार्च को वर्ल्ड स्लीप डे के तौर पर मनाया जाता है। आज हम आपको बताने जो रहे हैं ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के बारे में। अगर आपका बच्चा मुंह खोलकर सोता है और इस दौरान उसे खर्राटे आते हैं तो सचेत हो जाइये।
World Sleep Day, Be Alert Parents from Obstructive Sleep Apnea
Sleeping Baby
जाने-अनजाने वह ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया का शिकार हो रहा है। जो भविष्य में हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। आमतौर पर टॉन्सिल व एडीनॉयड से ग्रस्त बच्चों में ऐसी समस्या होती है। उन्हें बार-बार सर्दी-जुकाम होता है। इसे माता-पिता जानकारी के अभाव में अनदेखा करते हैं। मुंह खोलकर सोने के कारण जहां एक ओर बच्चे के जबड़े का विकास अवरोधित होता है, वहीं दूसरी ओर उसे ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया का शिकार बना रहा है।
World Sleep Day, Be Alert Parents from Obstructive Sleep Apnea
Sleeping Baby
यह जानकारी पीजीआई ईएनटी डिपार्टमेंट के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. संदीप बंसल ने दी। उन्होंने बताया कि ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया गंभीर हार्ट डिजीज के कारणों में से एक प्रमुख कारण है। जिस बच्चे में शुरुआती दौर से इसके लक्षण दिखते हैं उन्हें हार्ट डिजीज के साथ ही ग्लूकोमा, शुगर, डिप्रेशन और हाइपरटेंशन होने का भी खतरा ज्यादा होता है। इसलिए लक्षणों पर गौर करते हुए समय रहते इसका इलाज बेहद जरूरी है।
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Sleeping Baby
इलाज के तरीके
ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के इलाज के लिए विशेषज्ञ अलग-अलग विधियों का प्रयोग कर रहे हैं। डॉ. बंसल के अनुसार सबसे कारगर है लाइफस्टाइल मॉडिफिकेशन, जिसमें व्यायाम, वजन पर नियंत्रण को शामिल किया गया है। क्योंकि ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के 60 से 70 प्रतिशत मरीज ज्यादा वजन के शिकार पाये गये हैं। इसकेअलावा सीपैप मशीन के माध्यम से भी इस पर काबू पाने का प्रयास होता है। अंतिम विकल्प के तौर पर सर्जरी की जाती है।
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सांकेतिक तस्वीर
तेजी से बढ़ रही जागरूकता
डॉ. बंसल ने बताया कि खर्राटे को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। कल तक लोग जिसे गहरी नींद में सोना समझकर नजरअंदाज करते थे आज उसका इलाज कराने आ रहे हैं। जागरूकता का ही नतीजा है कि ओपीडी में  ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया के मरीजों की संख्या महज एक साल में दो से 10 हो गई है। वहीं हर महीने 20 से 25 स्लीप स्टडी हो रही है। लोगों को जागरूक करने के लिए ही हर साल 13 मार्च को वर्ल्ड स्लीप डे मनाया जाता है।
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