आर्थिक तंगी थी तो सिर्फ दोपहर के खाने के लिए स्कूल में एडमिशन ले लिया। अब अपनी मेहनत से देखिए क्या कारनामा किया है इस बच्ची ने...
हरियाणा के रेवाड़ी के ढालियावास गांव की वंदना जिसके पिता भूरेलाल मजदूरी और मां मंदो देवी घरों में काम करती है। आर्थिक तंगी तो थी ही, पैसा कमाने के लिए दोनों सुबह-सुबह काम पर निकल जाते थे तो बेटी घर पर अकेली और भूखी रह जाती थी।
सरकारी स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ भोजन भी मिलता है, पता चलते ही वंदना का स्कूल में एडमिशन करा दिया गया। तीसरी क्लास में पहुंची तो एक दिन उसने अपने टीचर जितेंद्र यादव को बेटे यश के साथ शतरंज खेलते हुए देखा।
यश इस खेल में स्टेट लेवल पर तीन बार जिले का प्रतिनिधित्व कर चुका है और वर्तमान में नवोदय स्कूल का स्टूडेंट है। एक दिन यश अकेले शतरंज की प्रेक्टिस कर रहा था। वंदना ने अपने टीचर से खेलने की इच्छा जताई।
दो तीन बार खेलने के बाद इस लड़की ने यश को हराया तो जितेंद्र यादव को हैरानी हुई। उसके बाद वंदना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सबसे पहले उसने अगस्त 2016 में गांव मसानी के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई इस खेल की खंड स्तरीय प्रतियोगिता जीती।