कोरोना ने हमसे सिर्फ छीना ही नहीं, बल्कि बहुत कुछ सिखाया भी। कोरोना काल में कई सकारात्मक बदलाव आए है। तमाम अच्छी आदतें सीखने को मिलीं। इन आदतों की वजह से हमने न सिर्फ कोरोना को हराया बल्कि दूसरी बीमारियों को पास फटकने नहीं दिया। जो लोग ऑनलाइन, सोशल मीडिया जैसे शब्दों से नाक सिकोड़ते थे, वह लोग अपने बनाए वीडियो को रिश्तेदारों व दोस्तों के बीच शेयर करने लगे। फिटनेस के प्रति झुकाव भी देखा गया। अच्छी आदतों से ही देश का नवनिर्माण होता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि समय के साथ आपने आपको बदलने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। एक नजर डालते हैं उन आदतों पर, जिन्हें पिछले एक साल के दौरान लोगों ने अपनाया।
लॉकडाउन का एक साल : कोरोना ने सिर्फ छीना ही नहीं, ये आदतें भी सिखाई, जानते हैं आप
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हाथ धोने की आदत
कोरोना वायरस ने लोगों को हाथ धोने की आदत सिखा दी है। अब लोग दिन में कई बार सैनिटाइजर या साबुन से हाथ को साफ कर रहे हैं। आज से एक साल पहले तक ऐसा नहीं था। यहां तक कि कुछ खाने से पहले भी लोग हाथ तक नहीं धोते थे। कोरोना संकट की वजह से अब लोगों को समझ में आ चुका है कि हाथ का साफ रहना कितना जरूरी है। इससे फायदा यह हुआ है कि बीते साल पेट से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या में काफी गिरावट आई है।
छींकते या खांसते वक्त आसपास वालों का ख्याल रखना
छह महीने पहले लोग मनमाने तरीके से जोर-जोर से छींकते देखे जा सकते थे। इस दौरान वे इस बात का भी ध्यान नहीं रखते थे कि उनके आसपास लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा। कोरोना संकट के दौरान बरती जाने वाली अतिरिक्त सावधानी का असर यह हुआ है कि अब लोग रुमाल, टिश्यू पेपर, मास्क या कोहनी के सहारे बहुत संभलकर छींकते या खांसते दिखाई देते हैं।
एक्सरसाइज व योग की ओर बढ़ा रुझान
स्वास्थ्य से संबंधित कई एजेंसियों ने कहा है कि कोरोना से बचाव के लिए शरीर को अंदर से मजबूत रखना जरूरी है। इसके लिए पौष्टिक खाने के साथ शरीर को चुस्त-दुरस्त रखना होगा। नतीजा यह रहा कि सवेरे और शाम को पार्क व मैदानों में लोगों की भीड़ दिखने लगी है। लॉकडाउन में कई लोगों ने घर के अंदर योग व एक्सरसाइज की आदत डाल ली थी, जो अब भी बरकरार है।
कम खर्च में जीवन यापन करना
लॉकडाउन ने यह भी सिखा दिया है कि कम खर्च में भी जीवन बसर किया जा सकता है। अब ज्यादातर लोग अधिक खर्च करने से बच रहे हैं। पैसे सिर्फ उन्हीं चीजों पर खर्च कर रहे हैं, जो जरूरी है। दरअसल, लॉकडाउन के दौरान कई लोगों की नौकरी चली गई या कई लोगों को कम वेतन में गुजारा करना पड़ा। इससे लोग भविष्य के प्रति आशंकित हुए और कम खर्च करने की आदत डाली।