बोल मेरे पांसे... पंजाब में किसकी सरकार?
कांग्रेस की सरकार
वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस को 40 फीसदी से ज्यादा वोट मिला था। तब पीपीपी ने भी कांग्रेस के वोट में कुछ सेंध लगाई थी। इस बार समीकरण बदले नज़र आ रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के पक्ष में मत प्रतिशत की मामूली सी बढ़ोतरी भी उसे आसानी से पूर्ण बहुमत दिला सकती है। पिछली बार कांग्रेस को दोआबा और माझा में मुंह की खानी पड़ी थी। इस बार अमृतसर में सिद्धू फैक्टर सिर चढ़कर बोल सकता है। जालंधर और होशियारपुर में भी कहानी पलटती है तो कांग्रेस के हाथ दस साल बाद बड़ी लाटरी लग सकती है।
आप की सरकार
पिछले विधानसभा चुनाव में आप परिदृश्य में नहीं थी, मगर 2014 के लोकसभा चुनाव में चार सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी ने इतिहास रच दिया था। पार्टी ने 24.4 फीसदी वोट हासिल कर पंजाब में तीसरे विकल्प की नई हवा खड़ी की। मालवा के गांवों में जिस तरह आप ने पंथक वोटों पर पकड़ बनाई है, उससे शिअद की पारंपरिक जमीन में सेंध लगती नजर आई। एनआरआई के जरिए पार्टी ने दोआबा में भी मेहनत की है। यह पार्टी छुपा रूस्तम साबित हो सकती है और कोई भी चमत्कार करने में सक्षम है।
शिअद-भाजपा हैट्रिक
राजनीतिक विश्लेषकों को इसकी संभावना काफी कम नज़र आ रही है। मगर पंजाब में सड़कों और बिजली को लेकर हुए ढांचागत विकास पर अगर जनता भरोसा जताती है या सस्ते घी-चीनी का चुनावी वादा जनता के सिर चढ़कर बोला तो शिअद और भाजपा गठबंधन एक बार फिर पंजाब में सरकार बनाकर हैट्रिक लगा सकता है। अगर आम आदमी पार्टी शहरों में कांग्रेस वोट काटने में सफल रहती है तो भी गठबंधन को लाभ मिल सकता है।
आप की सरकार
अगर त्रिशंकु विधानसभा में आप की सीटें 45 से ज्यादा रहती हैं और कांग्रेस तथा शिअद-भाजपा गठबंधन 40 से कम पर सिमटते हैं तो ऐसे में भाजपा और शिअद राष्ट्रपति शासन चाहेंगे, मगर कांग्रेस इससे बचने के लिए आम आदमी पार्टी को बाहर से समर्थन की घोषणा कर सकती है। दिल्ली में केजरीवाल की पहली सरकार को कांग्रेस ने इस तरह से बाहर से समर्थन दिया था। हालांकि ऐसी सरकार कब तक चलेगी, यह कहना मुश्किल है।