हम आपको सुना रहे हैं, इंडियन क्रिकेट टीम के उस स्टार प्लेयर की जिंदगी का एक किस्सा, जिसके कारण उन्होंने सुसाइड करने की ठान ली थी।
बात हो रही है, सुरेश रैना की। शनिवार को वे पीजीआई चंडीगढ़ के एडवांस पेडिएट्रिक सेंटर स्थित प्लेवे में पहुंचे। बिना किसी निर्धारित कार्यक्रम के क्रिकेटर सुरेश रैना यहां पहुंच गए और बच्चों के साथ खेलने लगे। उन्होंने एक-एक बच्चे से उनकी तबीयत के बारे में बात की। उनके साथ कैरम व लूडो खेला और जाते वक्त उन्हें गिफ्ट्स दे गए। इन सब में सुरेश का साथ दिया उनकी पत्नी प्रियंका चौधरी ने।
दरअसल सिटी बेस्ड एनजीओ, "नन्हीं जान'' यहां अकसर बच्चों के साथ इवेंट्स आयोजित करती है। इसी में शामिल होने की इच्छा प्रियंका चौधरी ने जताई थी और उन्हें ही यहां बच्चों से मिलना था। पर सुरेश रैना बिन बताए ही उनके साथ आ गए थे। इस मौके पर सुरेश रैना ने जिंदगी का एक ऐसा किस्सा बताया कि सुनकर सभी के होश उड़ गए।
सुरेश रैना ने बताया कि उन्होंने जीवन का लंबा समय हॉस्टल में गुजारा, जहां उनको रोजाना नई-नई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। सीनियर्स अमानवीयता की हद तक उन्हें परेशान किया करते थे और इससे तंग आकर उन्होंने आत्महत्या तक करने की ठान ली थी। शुरुआती दिनों में जब वह ट्रेन के फर्श पर न्यूज पेपर बिछाकर सोते हुए मैच खेलने के लिए जाया करते थे।
रैना ने बताया कि एक बार एक लड़के ने उनके ऊपर पेशाब कर दिया था। लड़के दूध की डोल्ची में गंदगी वगैराह डाल देते थे हम इसे छन्नी की मदद से साफ किया करते। सर्दियों की कड़कड़ाती रात में भी सुबह तीन बजे दूध की डोल्ची बिखेर देते थे। अगर उनसे लड़ते तो हमें पता था अगर हम उन्हें एक मारेंगे तो पांच और आ जाएंगे। परेशान होकर उन्होंने हॉस्टल छोड़ दिया था।