जब तक हौंसला कायम होता है, तब तक बड़ी से बड़ी बाधा भी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती है। ऐसी ही बाधाओं को पार करते हुए सोनीपत के मदीना गांव की पहलवान सोनम मलिक आज कुश्ती का बड़ा चेहरा बनी है। सोनम को चार साल पहले लकवा मारने पर छह महीने के लिए बिस्तर पर रहना पड़ा और डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि वह अब खेल नहीं सकती है। उसके बाद भी सोनम ने हिम्मत नहीं हारी और वह दोबारा खड़ी होकर अखाड़े में उतरी। जहां उन्होंने देश के सबसे युवा एथलीट का सम्मान प्राप्त किया, वहीं सबसे कम उम्र में ओलंपिक खेलेगी और विश्व के दिग्गज पहलवानों के सामने चुनौती बनकर खड़ी होंगी। यह खिलाड़ी न हार से डरती है और ना ही चोट लगने के भय से मैदान से दूर भागती है। ओलंपिक कोटा हासिल करना सोनम के लिए सहज नहीं था। वह नेशनल ट्रायल में लडऩे के लिए कैडेट से सीनियर में उतरी, ऐसे में फेडरेशन को लिखकर देना पड़ा कि अगर कुश्ती के दौरान कुछ होता है तो उसका जिम्मेदार सोनम एवं परिवार खुद होगा।
Tokyo Olympic 2021: प्रेरक है लकवा को हरा सबसे कम उम्र में ओलंपिक खेलने वाली पहलवान सोनम मलिक की कहानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 23 Jul 2021 04:07 PM IST
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