शादी के बाद भी सकारात्मक सोच से ब्यूटी पेजेंट के जरिये ख्वाबों को पंख दिए जा सकते हैं। डॉक्टर होने के साथ-साथ ग्लैमर वर्ल्ड में खुद की पहचान कायम कर फैशन की बानगी पेश की और लोगों के तानों को सकारात्मक दृष्टिकोण से लेकर अपने आपको साबित किया।मुंबई जैसे बड़े शहर की बेटी से लेकर हरियाणा के रोहतक की बहू और मिसेज क्लासिक यूनिवर्स, यूएसए के खिताब तक के सफर को अमर उजाला के साथ साझा किया मिसेज क्लासिक यूनिवर्स, यूएसए-2019 का खिताब जीतने वाली डॉ. रागिनी सिंह ने। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्लैमर वर्ल्ड में उभरता चेहरा डॉ. रागिनी सिंह गुरुवार को अमर उजाला कार्यालय पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने अपनी सफलता की कहानी साझा की।
Pics: दुनिया में छाई रोहतक की डॉक्टर बहू, कभी 110 किलो था वजन, लोग मारने लगे थे ताने
जब लोगों ने दिया ताना ...अपने हसबैंड की मदर लगती हो
बीपीएसम महिला मेडिकल कॉलेज खानपुर में ब्लड बैंक की हेड डॉ. रागिनी सिंह का मानना है कि सकारात्मक दृष्टिकोण, परिवार का साथ और दैवीय शक्ति में विश्वास हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं। आमतौर पर जब महिलाएं शादी, नौकरी और बच्चों के बाद नाउम्मीदी की जिंदगी जीने लगती हैं तो उसी दर्रे पर आकर रागिनी ने खुद पर विश्वास करते हुए लोगों के तानों को दरकिनार कर अपने आपको साबित किया। डॉ. रागिनी बताती हैं कि बेटे की डिलीवरी होने के बाद एक समय ऐसा भी था जब उनका वजन 110 किलोग्राम हो गया था और लोग उन्हें कहने लगते थे रागिनी तुम तो अपने हसबैंड की मदर लगती हो। उस समय रागिनी ने लोगों के तानों को चैलेंज के रूप में लिया और परिवार के सहयोग से मंजिल की ओर कदम उठाए। आज डॉ. रागिनी न सिर्फ महिलाओं के लिए आदर्श हैं, बल्कि वह क्लासिक यूनिवर्स और न्यूयार्क फैशन वीक की ब्रांड एंबेसडर भी हैं।
जब दोस्तों ने कहा तुम मुंबई से हरियाणा क्यों...
मुंबई की बेटी रागिनी जब शादी कर हरियाणा के रोहतक में आई तो दोस्तों ने कहा ...तुम मुंबई से हरियाणा क्यों...? ऐसे में मैंने खुद पर और अपने माता-पिता के फैसले पर विश्वास किया, क्योंकि हमारे अभिभावक हमारे लिए हमसे बेहतर ही सोचते हैं। उन्होंने बताया कि आज मुझे गर्व है कि मेरे माता-पिता ने इतना अच्छा परिवार और पति मेरे लिए खोजा, जो न सिर्फ मेरे सपनों को समझता है, बल्कि उन्हें मेरे साथ जीता है।
लड़के बनें संवेदनशील और बेटियां भी रहें सतर्क
समाज में बढ़ रहे दुष्कर्म जैसे अपराधों पर डॉ. रागिनी ने कहा कि सरकार कानून हमारी सुरक्षा के लिए बनाती है लेकिन हम उन्हें फॉलो नहीं करना चाहते। बेटों को संवेदनशील और बेटियों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। हम विदेश के कानूनों की आज दुहाई देते हैं। बता दूं विदेश में सरकार लड़कियों को ऐले एरिया (जहां ड्रग्स एडिक्ट लोग हों) से दूर रहने की सलाह देती हैं। ऐसे में क्यों हम हमारे देश के कानूनों को मानने से कतराते हैं।
डॉ. रागिनी ने अपने 12 साल के बेटे भव्य सिंह गहलोत का उदाहरण देते हुए बताया कि बेटे को स्कूल बस में खेल-खेल में एक लड़की ने चार थप्पड़ मार दिए तो बेटे ने भी पलट कर एक थप्पड़ मारा। ऐसे में घर आने पर मैंने बेटे से पूछा आपने लड़की को थप्पड़ क्यों मारा? तो बेटा बोला मम्मा उसने मुझे चार थप्पड़ मारे, आपने वह नहीं पूछे, मैंने एक मारा आप उस बारे में क्यों पूछ रही हो।