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एक थे बाबा मोहर, जिनसे खौफजदा थे अंग्रेज...सुबह ट्रायल, दोपहर को सजा, शाम को फांसी

Wed, 15 Aug 2018 10:45 AM IST
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 15 Aug 2018 10:45 AM IST
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Story of Ropar's freedom Fighter Baba Mohar Singh
बाबा मोहर सिंह
बाबा मोहर सिंह को जानते हैं। इनसे अंग्रेज इतना डरते थे कि सुबह ट्रायल किया, दोपहर को सजा सुनाई और शाम को फांसी दे दी। जनिए इनके बारे में... 

 
Story of Ropar's freedom Fighter Baba Mohar Singh
1947 freedom movement - फोटो : file photo
अपने साथियों के साथ गुरिल्ला युद्ध में माहिर रोपड़ (पंजाब) के रहने वाले बाबा मोहर सिंह आहलुवालिया कलाल से अंग्रेज इस कदर दहशतजदा थे, उन्हें पकड़कर तुरंत फांसी देने का फैसला किया गया।अंग्रेज सिपाहियों की बड़ी टुकड़ी की मदद से घेराबंदी कर बाबा मोहर सिंह को बमुश्किल उनके तीन साथियों के साथ पकड़ा गया और संयुक्त पंजाब के  ही जिला अंबाला लाया गया। 5 जून 1857 को अंबाला डिवीजन (हरियाणा, पंजाब, हिमाचल के कई जिले शामिल थे) के तत्कालीन कमिश्नर जीसी बर्निस ने उन्हें तुरंत फांसी देने की सजा सुनाई। 5 जून 1857 को तत्कालीन कमिश्नर जीसी बर्निस की अदालत सुबह 10 बजे शुरू हुई। 
Story of Ropar's freedom Fighter Baba Mohar Singh
बाबा मोहर सिंह समाधि स्थल
कई घंटों की लंबी बहस चली। इस दौरान बाबा मोहर सिंह को बड़ा खतरा बताते दोपहर 3.30 बजे फांसी की सजा सुना दी गई। एक घंटे के भीतर शाम 4.30 बजे काली पलटन क्षेत्र से दो कोस पश्चिम की ओर जंडली गांव से आगे, धूलकोट गांव के पास बड़ के पेड़ में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में बाबा मोहर सिंह और उनके तीन साथियों को फांसी पर लटका दिया गया। यह देश की पहली ऐसी ऑन रिकार्ड फांसी थी, जिसमें क्रांतिकारी का ट्रायल एक ही दिन में पूरा कर, उसी दिन उसे फांसी पर लटका दिया गया।
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Story of Ropar's freedom Fighter Baba Mohar Singh
सांकेतिक तस्वीर
आजादी की चिंगारी को दबाना चाहते थे अंग्रेज
इतिहासविद सरदार तेजिंद्र सिंह वालिया ने बताया कि उक्त घटना का खुलासा म्यूटिनी और अभिलेखागार विभाग के रिकार्ड में तो होता ही है, साथ ही सन 1861 में अंग्रेज
लेखक जे. केव ब्राउन ने अपनी पुस्तक ‘पंजाब एंड हरियाणा 1857’ के पेज 194 पर भी बाबा मोहर सिंह का जिक्र करते हुए कहा है कि मोहर सिंह संयुक्त पंजाब के
अंबाला डिवीजन के लिए बहुत बड़ी समस्या है। इतिहासविद ने बताया कि सरेआम मोहर सिंह को फंदे पर लटकाकर अंग्रेज इस क्रांति की आग को दबाना चाहते थे। 
 
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Story of Ropar's freedom Fighter Baba Mohar Singh
सांकेतिक तस्वीर
सरदार तेजिंद्र ने बताया कि बाबा मोहर सिंह को फांसी देकर अंग्रेज संयुक्त पंजाब में क्रांति की चिंगारी को दबाने का काम किया था। उस वक्त गुरिल्ला युद्ध में महारथी बाबा मोहर सिंह ने अपने साथियों के साथ अंग्रेजों पर कई हमले बोले और अंग्रेजों का खजाना भी लूटा। बाबा मोहर सिंह ने गढ़ी कोटाहा इलाके को कैप्चर भी कर लिया था और वे
अंग्रेजों से बिल्कुल भी डरते नहीं थे। उन्होंने ठान ली थी कि वे क्षेत्र को अंग्रेजों को मुक्त करवाकर ही दम लेंगे। तेजिंद्र सिंह वालिया ने इस घटना का जिक्र अपनी पुस्तक
‘हिस्टोरिकल सागा ऑफ टिस सतलुज स्टेट’ में भी किया है।

 
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