2 जनवरी 2016 को रणनीतिक रूप से भारत के सबसे महत्वपूर्ण पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन में घुसे जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अपने साथ मोर्टार राउंड, हैंड ग्रेनेड, असाल्ट राइफल्स के साथ-साथ ऐसा केमिकल भी लाए थे, जो किसी भी चीज से टकराते ही भयंकर आग बरसा दे। इन आतंकियों का इरादा एयरफोर्स स्टेशन में धमाकों, फायरिंग के साथ-साथ एक बड़ी आगजनी को भी अंजाम देने का था। लेकिन एनएसजी और एयरफोर्स के कमांडो की बहादुरी ने न केवल इन आतंकियों के मंसूबों को पस्त कर दिया, बल्कि एक लंबी मुठभेड़ के बाद उन्हें ढेर भी किया।
पठानकोट आतंकी हमलाः वायुसेना ने जाबांजों को किया याद, पढ़ें- ‘तूफान आ गया है’ कोडवर्ड की कहानी
इस दौरान हमारे जवान भी शहीद हुए, जिन्हें पठानकोट आतंकी हमले की चौथी बरसी पर इंडियन एयरफोर्स ने याद कर सलाम किया है। एयरफोर्स के एक आला अफसर के अनुसार आतंक के खिलाफ इंडियन एयरफोर्स का यह एक पराक्रमी एक्शन था। इस एक्शन ने बता दिया था कि ऐसी हिमाकत भविष्य में कभी बरदाश्त नहीं होगी। इस दौरान शहीदों की शहादत को भी हमेशा याद रखा जाएगा। इस घटना के दौरान आतंकियों का इरादा बहुत खौफनाक था। अपने नापाक मंसूबों के चलते वे पठानकोट एयरबेस में दाखिल होने के बाद डिफेंस सिक्योरिटी कोर तक पहुंच चुके थे। आतंकी अपने साथ जो केमिकल वे लाए थे, उसका इस्तेमाल उन्होंने एयरफोर्स स्टेशन में बने भवनों में आग लगाने के लिए करना था।
सूबेदार जगदीश चंद जो कि राष्ट्रीय स्तर के पूर्व पहलवान थे, उन्होंने आतंकियों को देखा और उनसे निहत्थे भिड़ गए। उन्होंने एक आतंकी की बंदूक छीन ली और उसे गोली मार दी। लेकिन इस मुठभेड़ में जगदीश चंद भी शहीद हो गए। इसी दौरान एक अन्य मुठभेड़ में एयफोर्स के गरूड़ कमांडो पर देखते ही आतंकियों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दी। कारपोरल गुरसेवक सिंह को गोली लग चुकी थी, मगर घायल होने के बावजूद वे लगातार आतंकियों पर गोलियां चला रहे थे। 7 मिनट तक गोलियां चलती रही, उसके बाद आतंकियों ने एक वाहन में आग लगाई और धुएं की आड़ में वे वहां से निकल गए। इस मुठभेड़ में कारपोरल गुरसेवक भी शहीद हो गया। जिन्हें बाद में शौर्य चक्र से नवाजा गया।
कोडवर्ड से एनएसजी को मिली सूचना ‘तूफान आ गया है’
एयरफोर्स स्टेशन में आतंकियों के घुसने की भनक हवाई निगरानी कर रहे ड्रोन ने भांप ली थी। ये लोग एयरफोर्स स्टेशन के सुनसान इलाके में एक साथ घूम रहे थे, जिससे ये संदेह के घेरे में आए, बाद में आतंकी अलग-अलग हुए थे। आतंकियों की भनक लगते ही एनएसजी को एक कोडवर्ड के जरिये सूचना भेजी गई कि ‘तूफान आ गया है’।
उसके बाद मोर्चा एनएसजी टास्क फोर्स, गरूड़ कमांडो और लड़ाकू हेलीकाप्टर एमआई-35 ने अलग-अलग मोर्चा संभाला। लंबी मुठभेड़ के बाद कमांडो ने आखिरी ‘हिट मूव’ के साथ सभी आतंकी पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन में ही ढेर कर दिए गए। आतंकियों की मौत के बाद एक बड़ा नुकसान उस वक्त हुआ जब शवों की तलाशी के दौरान बम निरोधक दस्ते के लीडर लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन एक हैंड ग्रेनेड के धमाके से शहीद हो गए और उनके साथी सेकेंड इन कमांड मेजर त्यागी घायल हो गए। यह हैंड ग्रेनेड मृतक आतंकियों की जेबों में से तलाशी के दौरान निकाले जा रहे थे।