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बच्चों को सुलाने और जगाने का अपनाएं ये टाइम टेबल, कोसों दूर रहेंगी बीमारियां

Fri, 12 Apr 2019 07:03 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 12 Apr 2019 07:03 PM IST
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Sleeping and awakening time tables affected helth of children
सांकेतिक तस्वीर

अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चों से सिरदर्द व न्यूरो डिसआर्डर से संबंधित बीमारियां दूर रहें तो उनके सोने और जागने का समय तय करना होगा। पीजीआई के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर विवेक लाल ने बताया कि सोने का उचित समय रात 9 से साढ़े नौ बजे का है और जागने का सुबह साढ़े चार बजे। 

गर्मियों में माइग्रेन के डबल मरीज

Sleeping and awakening time tables affected helth of children
सांकेतिक तस्वीर

दरअसल, ब्रेन में मेलाटॉनिन नाम का एक हार्मोन होता है, जो शरीर को अपना नींद चक्र बनाए रखने में मदद करता है। अंधेरा होते ही मेलाटॉनिन हार्मोन का प्रभाव कम होने लगता है और अल सुबह यह एक्टिव मोड में आने लगता। जब नींद यह चक्र प्रभावित होता है तो बच्चों में बीमारियां पनपती हैं। इसलिए बच्चों को देर तक न जागने दें।

उनमें जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत डालने की कोशिश करें। प्रोफेसर विवेक लाल ने यह दावा भी किया है कि भले ही इंसान देर रात तक जगता हो, लेकिन उसका दिमाग सोता रहता है। पीजीआई में अगले तीन दिन न्यूरोलॉजी डिसआर्डर पर कॉनफ्रेंस होगी। जिसे एम्स और पीजीआई मिलकर आयोजित कर रहे हैं।

ऐसे बचें माइग्रेन से

Sleeping and awakening time tables affected helth of children
सांकेतिक तस्वीर

प्रोफेसर विवेक लाल और प्रोफेसर मनीष मोदी ने बताया कि गर्मियों के दिनों में माइग्रेन के मरीज डबल हो जाते हैं। गर्मियों में इसकी मुख्य वजह सिर पर सीधे धूप का पड़ना और नमी है। अप्रैल शुरू होते ही माइग्रेन के मरीजों में बढ़ोतरी होती है, जो सितंबर तक जारी रहते हैं। 

उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि मान लिजिए की एक ओपीडी में 100 लोग आते हैं तो उनमें 40 मरीज माइग्रेन, 20 मरीज मिर्गी, 10 स्ट्रोक व 30 अन्य न्यूरो डिसआर्डर के होते हैं। माइग्रेन पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ज्यादा होती है। यह बच्चों में भी काफी होता है।

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सांकेतिक तस्वीर

हर तरह का सिरदर्द माइग्रेन ही होता है
प्रोफेसर विवेक लाल ने बताया कि मरीजों को माइग्रेन के प्रति अभी जागरूकता काफी कम है। कई मरीज आधे सिर में दर्द की बीमारी लेकर आते हैं। वे समझते हैं कि दर्द की कोई और वजह है। हर सिरदर्द माइग्रेन है।

कई बार तो इतना दर्द होता है कि जैसे सिर पर हथौड़े पड़ रहे हों। यह दर्द इतना तेज होता है कि कुछ वक्त के लिए मरीज ढंग से कामकाज भी नहीं कर पाता। माइग्रेन की प्रमुख वजह सोने का तय वक्त न होना, व्रत रखना, तनाव, हार्मोन में बदलाव व तेज आवाज भी हो सकता है।

मोबाइल पर वीडियो गेम्स बढ़ाते हैं मिर्गी के खतरे
पीजीआई के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉक्टरों ने बताया कि मोबाइल पर लगातार गेम्स खेलने पर बच्चों में मिर्गी के खतरे बढ़ते हैं। इससे बच्चों में फोटो सेंसटिव मिर्गी के लक्षण दिखते हैं। बार-बार तेजी से फोटो के इधर-उधर होने से ही बच्चों के दिमाग पर असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि उनके पास कई बच्चे आए, जो देर तक मोबाइल पर वीडियो गेम्स खेलते थे। इससे उनमें मिर्गी के लक्षण दिखने लगे। इसलिए बच्चों को मोबाइल से दूर रखें।

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सांकेतिक तस्वीर

तापमान में तेज बदलाव से बचें। मसलन, एसी से एकदम गर्मी में न निकलें या फिर तेज गर्मी से आकर बहुत ठंडा पानी न पिएं।
सूरज की सीधी रोशनी से बचें। अगर आप बाहर निकल रहे हैं तो छाता लेकर और सन ग्लासेज पहनकर निकलें।
गर्मी के मौसम में कम-से-कम ट्रेवलिंग करें।
गर्मी और उमस से बचने के लिए ठंडी जगह (एसी) में रहें।
दिन में 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं, वरना डिहाइड्रेशन हो सकता है। डिहाइड्रेशन माइग्रेन का प्रमुख सामान्य कारक होता है। शरीर में पानी रहेगा तो माइग्रेन के चांस कम होंगे।
बरसात के मौसम में जब उमस बहुत ज्यादा होती है, हमें वैसी चीजों को खाने-पीने से बचना चाहिए, जिससे पसीना ज्यादा निकलता है, जैसे कि चाय-कॉफी। 
मिर्च न खाएं और मसालेदार खाने से बचें।
सुबह सूरज निकलने से पहले वॉक पर जाएं। नंगे पांव घास पर चलें। इससे तनाव कम होता है। तनाव कम होता है तो हॉर्मोंस भी बैलेंस हो जाते हैं। इन सब वजहों से माइग्रेन कम हो जाता है।
रोजाना 30 मिनट योगासन और प्राणायाम जरूर करें। इससे काफी फायदा होता है। मेटिडेशन भी कारगर है, चाहे रोज 10 मिनट ही करें।

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