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Shradh Paksha 2020: नवमी को होगा सौभाग्यवती स्त्री का श्राद्ध, जानिए कब करें कौन-सा श्राद्ध

Wed, 02 Sep 2020 10:08 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 02 Sep 2020 10:08 AM IST
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Shradh Paksha 2020: Shradh Start from 2 September
shradh - फोटो : अमर उजाला
सौभाग्यवती स्त्री का श्राद्ध हमेशा नवमी तिथि में ही किया जाता है, भले ही मृत्यु की तिथि कोई अन्य हो। जानिए कौन सा श्राद्ध और कब करना चाहिए।
Shradh Paksha 2020: Shradh Start from 2 September
shradh - फोटो : अमर उजाला
शुक्लपक्ष पितरों की रात्रि कही जाती है तथा भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा से पितरों का दिन प्रारम्भ हो जाता है, जो अमावस्या तक रहता है। यही कारण है कि अश्विन मास के कृष्ण पक्ष (पितृ पक्ष) में श्राद्ध करने का विधान है। वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया जाता है किंतु पितृ पक्ष में श्राद्ध करने का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इन पंद्रह दिनों में पितृ पृथ्वी पर किसी न किसी रूप में अपने परिजनों के बीच रहने आते हैं। यह जानकारी भृगु ज्योतिष केंद्र, महाकाली मंदिर, सेक्टर-30 चंडीगढ़ के ज्योतिषाचार्य पं. बीरेन्द्र नारायण मिश्रा ने दी।
Shradh Paksha 2020: Shradh Start from 2 September
shradh - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि कुतपवेला (अपराह्न काल) पितरों का समय कहा गया है। इस वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 1 सितम्बर को सुबह 9:40 से शुरू होकर 2 सितम्बर सुबह 10:52 तक रहेगी। अत: स्पष्ट है कि 1 सितम्बर 2020 को ही पूर्णिमा अपराह्नव्यापिनी है। क्योंकि कुतपवेला में ही श्राद्ध करने का शास्त्र नियम है इसलिए ‘प्रोष्ठपदी’ पूर्णिमा का श्राद्ध 1 सितम्बर को ही होगा। इसी प्रकार प्रतिपदा तिथि भी 2 सितम्बर को ही अपराह्नकाल व्यापिनी है क्योंकि प्रतिपदा तिथि 2 सितम्बर को सुबह 10:53 से प्रारम्भ होकर 3 सितम्बर को 12:27 पर समाप्त हो जाएगी। इसलिए प्रतिपदा का श्राद्ध 2 सितम्बर को होगा और द्वितीया का श्राद्ध 3 सितम्बर को। 4 सितम्बर को कोई भी तिथि अपराह्नव्यापिनी नहीं है, इसलिए 4 सितम्बर को कोई भी श्राद्ध नहीं है।
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Shradh Paksha 2020: Shradh Start from 2 September
पितृ पक्ष - फोटो : अमर उजाला
देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 चंडीगढ़ के श्रीराधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि जिनकी मृत्यु तिथि पूर्णिमा हो, उनका श्राद्ध प्रोष्ठपदी पूर्णिमा को ही करना चाहिए तथा सौभाग्यवती स्त्री का श्राद्ध हमेशा नवमी तिथि में ही किया जाता है, भले ही मृत्यु की तिथि कोई अन्य हो। इसी प्रकार संन्यासी का श्राद्ध हमेशा द्वादशी तिथि तथा जिनकी मृत्यु शस्त्र, विष, अकाल मृत्यु हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन ही किया जाता है। चतुर्दशी में सामान्य मृत्यु से मरने वालों का श्राद्ध अमावस्या या त्रयोदशी को करना चाहिए।   
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Shradh Paksha 2020: Shradh Start from 2 September
पितृ पक्ष
श्राद्ध की सूची निम्न प्रकार से है
1/9/2020    प्रोष्ठपदी/पूर्णिमा का श्राद्ध
2/9/2020    प्रतिपदा का श्राद्ध
3/9/2020    द्वितीया का श्राद्ध            
4/9/2020    कोई श्राद्ध नहीं
5/9/2020    तृतीया का श्राद्ध            
6/9/2020    चतुर्थी का श्राद्ध
7/9/2020    पंचमी/भरणी श्राद्ध
8/9/2020    षष्ठी का श्राद्ध
9/9/2020    सप्तमी का श्राद्ध
10/9/2020    अष्टमी का श्राद्ध            
11/9/2020    नवमी का श्राद्ध  
12/9/2020    दशमी का श्राद्ध
13/9/2020    एकादशी का श्राद्ध
14/9/2020    द्वादशी/संन्यासियों का श्राद्ध
15/9/2020    त्रयोदशी/मघा श्राद्ध  
16/9/2020    चतुर्दशी का श्राद्ध
17/9/2020    सर्वपितृ अमावस्या (पूर्णिमा तथा अज्ञात मृत्युतिथि वालों का श्राद्ध)
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