कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में देश के लिए पदक जीत लिया, उसके बावजूद शूटर अंकुर मित्तल खुश नहीं है। वे भावुक हो गए और दिल का दर्द साझा किया।
कांस्य पदक जीतकर शूटर अंकुर मित्तल खुश नहीं हैं। पिता को फोन करके उन्होंने कहा कि पापा मैं तो गोल्ड मेडल जीतने आया था। इस पर उनके पिता अशोक मित्तल ने कहा कि कोई बात नहीं बेटा। देश के लिए खेलते रहो। गोल्ड मेडल जीतने के कई मौके मिलेंगे। अंकुर मित्तल मूलरूप से भटगांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार कुछ समय पहले सोनीपत में आकर रहने लगा था।
इस समय अंकुर की प्रैक्टिस के कारण परिवार दिल्ली में रहता है। अंकुर के साथ उनके पिता अशोक, भाई अजय, मां संतोष सोनीपत आते रहते हैं। अंकुर के पिता अशोक ने बताया कि साल 2011 में इटली में हुए जूनियर शूटिंग वर्ल्ड कप के डबल ट्रैप राइफल में अंकुर ने पहली बार देश के लिए गोल्ड मेडल जीता था। इसके पीछे मुड़कर नहीं देखा। कांस्य मेडल जीतने के बाद अंकुर निराश हो गया था।
उसे समझाया गया है कि इस साल वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियाड भी होने है। फिलहाल वह जो मिला है उसे पाने की खुशी मनाए। इसके बाद अंकुर ने अपनी मां संतोष से फोन पर बात की तो उन्होंने भी उसका हौसला बढ़ाया।
नेशनल में मेडल जीत चुके है अंकुर, उनका भाई और पिता
अंकुर के पिता अशोक मित्तल ने बताया कि उन्होंने नेशनल स्तर पर मेडल जीता है। अंकुर का भाई अजय इंटरनेशनल शूटर रहा है। अंकुर के कोच भी उसके पिता अशोक ही हैं। इन तीनों के नाम एक बड़ी उपलब्धि जुड़ी है, जिसमें अंकुर, उनके भाई अजय व पिता अशोक ने रांची में 2011 में हुए नेशनल गेम्स में टीम इवेंट में एक साथ खेलते हुए कांस्य पदक जीता है।