18 साल के बाद शनैश्चरी अमावस्या पर शुभ महोत्सव योग आ रहा है, ऐसे में अगर लोग ये दो उपाय करेंगे तो किस्मत का बंद ताला खुला जाएगा।
सेक्टर-30 स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि चैत्र मास में यह शनैश्चरी अमावस्या 17 मार्च को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में आ रही है। 17 मार्च को राहुकाल सुबह नौ बजे से साढ़े दस बजे तक रहेगा। इसमें शनिदेव की आराधना की जाए तो निश्चित ही लाभ होगा।
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि यदि राहुकाल में किसी कारण वश पूजा न की जाए तो दोपहर 12 बजे से दोपहर बाद 2 बजे तक शनिदेव का अभिषेक करने का मुहूर्त है। मिश्र का कहना है कि अमावस्या 16 मार्च को शाम छह बजकर 18 मिनट से शुरू हो रहा है और शनिवार शाम छह बजकर 41 मिनट पर समाप्त हो रहा है।
शनिवार का दिन हो अमावस्या तिथि हो और शनि की राशि में अमावस्या तिथि आती हो और नवरात्र से पहले शनिवार का दिन हो तो शुभ महोत्सव योग बनता है। इसलिए दोपहर एक बजकर 31 मिनट से पहले कुंभ राशि होने के कारण शनैश्चरी अमावस्या का महत्व अधिक हो जाता है।
श्री महाकाली मंदिर में होगा शनिदेव का महाभिषेक
सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर में शनिवार को शनैश्चरी अमावस्या को शनिदेव का महाभिषेक होगा। पंचामृत से अभिषेक के बाद सरसों के तेल से शनिदेव का अभिषेक होगा। अभिषेक के बाद महापूजन और आरती होगी। मंदिर के प्रधान राकेश पाल मोदगिल ने बताया कि इस अवसर पर भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा।