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shaheed diwas, bhagat singh hideout place at firozpur, modi govt rewarded it heritage status
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देखिए वो गुप्त ठिकाना, जहां साथियों के साथ छिपा करते थे भगत सिंह
Fri, 24 Mar 2017 09:23 AM IST
amarujala.com- Written by: खुशबू गोयल
amarujala.com- Written by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 24 Mar 2017 09:23 AM IST
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह का घर
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शहीदी दिवस पर आपको दिखा रहे हैं, वो गुप्त ठिकाना जहां शहीद भगत सिंह अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ छिपकर रहा करते थे। देखिए तस्वीरों में।
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भगत सिंह शहीदी दिवस
फिरोजपुर के तूड़ी बाजार (मोहल्ला शहागंज) में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के ठिकाने को विरासत घोषित करने संबंधी नोटिफकेशन भी पंजाब टूरिज्म एंड कल्चर अफेयर डिपार्टमेंट की ओर से जारी कर दिया गया है। दिसंबर 2014 में विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर आपत्तियां मांगी थी, लेकिन किसी ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई थी। उक्त गुप्त ठिकाने की मालिकियत हक कृष्णा भक्ति सत्संग ट्रस्ट के पास है।
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भगत सिंह शहीदी दिवस
इस गुप्त ठिकाने में कौन-कौन क्रांतिकारी आते थे, क्या करते थे, अंग्रेजों के खिलाफ किस प्रकार की रणनीति, किन वजहों से गुप्त ठिकाना बनाया, इन तथ्यों की खोज लेखक राकेश कुमार ने की थी। इस संबंधी उन्होंने दो पुस्तकें प्रकाशित की हैं जो इस समय बाजार में उपलब्ध हैं। इस गुप्त ठिकाने संबंधी उन्होंने जिला प्रशासन को कई ऐतिहासिक जानकारी मुहैया करवाई थीं जो पंजाब सरकार तक पहुंचाई गईं थी।
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भगत सिंह शहीदी दिवस
लेखक ने बताया कि भगत सिंह और उसके साथियों ने क्रांतिकारी पार्टी का गुप्त ठिकाना यहां 10 अगस्त, 1928 से लेकर चार फरवरी 1929 तक रहा। अंग्रेजों से भारत को आजाद करवाने के लिए यह ठिकाना पार्टी की जरूरत तथा गतिविधियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। यहां पर भगत सिंह के अलावा चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, शिव वर्मा, विजय कुमार सिन्हा, डा. गया प्रसाद, महाबीर सिंह तथा जय गोपाल का आना-जाना था।
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शहीदे आज़म भगत सिंह
- फोटो : File Photo
गुप्त ठिकाना बनाने के तीन कारण: 1. पंजाब से विभिन्न ठिकानों जैसे दिल्ली, कानपुर, लखनऊ व आगरा इत्यादि जाने-आने के लिए क्रांतिकारी फिरोजपुर में बनाए गुप्त ठिकाने पर भेष बदलकर ट्रेनों में यात्रा करते थे। 2. बम बनाने का सामान जुटाने के लिए क्रांतिकारी डा. निगम को यहां पर निगम फार्मेसी और ड्रग्सिट की दुकान खुलवाई थी। 3. डाक्टरी पेशा चलने पर पार्टी की आर्थिक सहायता की जाए।
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