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सजा के ऐलान के बाद बच्चों के 'बलात्कारी' का कोर्ट के बाहर ड्रामा, देखिए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 24 Dec 2016 09:48 AM IST
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जुल्फिकार खान
- फोटो : अमर उजाला
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मासूम बच्चों से कुकर्म मामले में सजा का ऐलान होने के बाद आरोपी जुल्फिकार खान ने कोर्ट के बाहर जमकर हंगामा किया। नाबालिगों से कुकर्म मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय से सजा सुनाए जाने के बाद जुल्फिकार खान हक्का-बक्का रह गया। सजा सुनाए जाने से पहले हंस-हंसकर बात करने वाला जुल्फिकार सजा सुनाने के बाद एकदम शांत हो गया। उसके चेहरे पर चिंता के भाव और तनाव साफ दिख रहे थे।
इसके बाद उसने जज साहब से दो मिनट के लिए अपनी बात रखने की अपील की। उसकी अपील पर जज कोर्ट रूम में आए तो जुल्फिकार ने उनसे कहा ‘जज साहब उसने उनके बारे में जेल में काफी कुछ सुनना है। इसलिए आपसे एक गुजारिश है कि आप बस मेरी एक बात सुन लें। सुप्रीम कोर्ट तक मेरी दरख्वास्त भेज दें। चाहे वह स्वीकार करें या न करें, मुझे संतुष्टि हो जाएगी।’
उसका कहना था कि ‘ऐसे मामलों में पुलिस केस दर्ज करने से पहले या अदालत मौखिक शिकायत पर केस दर्ज करने के साथ ही सबूत जरूर मांगे। 2007-10 के बीच कुछ गलत करने के आरोप से इतने साल बाद कैसे खुद को पाक साफ दिखाऊं? वर्षों पहले लगे इल्जाम से अब कैसे खुद को बेगुनाह साबित करूं।’
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इतना ही नहीं उसने यह भी कहा कि अगर इस तरह के झूठे आरोप लगेंगे तो कोई भी भविष्य में सामाजिक सेवा नहीं करेगा। उसने भारी आवाज में अदालत में कहा कि, ‘मेरा नाम जुल्फिकार खान है और मैंने इस शहर में 25 साल शाही जिंदगी गुजारी, लेकिन कुछ लोगों ने उसे मिलकर तबाह कर दिया। उसका सब कुछ छीन लिया।’उसके इतना कहने के बाद जज अपनी सीट से यह कहकर उठ गए कि वह उनकी बात को देखेंगे।
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इसके बाद उसने जज साहब से दो मिनट के लिए अपनी बात रखने की अपील की। उसकी अपील पर जज कोर्ट रूम में आए तो जुल्फिकार ने उनसे कहा ‘जज साहब उसने उनके बारे में जेल में काफी कुछ सुनना है। इसलिए आपसे एक गुजारिश है कि आप बस मेरी एक बात सुन लें। सुप्रीम कोर्ट तक मेरी दरख्वास्त भेज दें। चाहे वह स्वीकार करें या न करें, मुझे संतुष्टि हो जाएगी।’
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उसका कहना था कि ‘ऐसे मामलों में पुलिस केस दर्ज करने से पहले या अदालत मौखिक शिकायत पर केस दर्ज करने के साथ ही सबूत जरूर मांगे। 2007-10 के बीच कुछ गलत करने के आरोप से इतने साल बाद कैसे खुद को पाक साफ दिखाऊं? वर्षों पहले लगे इल्जाम से अब कैसे खुद को बेगुनाह साबित करूं।’
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इतना ही नहीं उसने यह भी कहा कि अगर इस तरह के झूठे आरोप लगेंगे तो कोई भी भविष्य में सामाजिक सेवा नहीं करेगा। उसने भारी आवाज में अदालत में कहा कि, ‘मेरा नाम जुल्फिकार खान है और मैंने इस शहर में 25 साल शाही जिंदगी गुजारी, लेकिन कुछ लोगों ने उसे मिलकर तबाह कर दिया। उसका सब कुछ छीन लिया।’उसके इतना कहने के बाद जज अपनी सीट से यह कहकर उठ गए कि वह उनकी बात को देखेंगे।
कोर्ट रूम के बाहर नाटक
कोर्ट रूम के बाहर नाटक!
सजा के बाद तनाव में आए जुल्फिकार ने कोर्ट रूम के बाहर नुक्कड़ नाटक की तरह ड्रामा किया। उसने उसे जेल भिजवाने वाले पीड़ित बच्चों की कथित उम्र प्रमाण पत्र के दस्तावेज दिखाने का प्रयास किया। साथ ही सवाल उठाए कि जिनका जन्म वर्ष 1992 का है क्या यह बच्चे हैं।
उसने कहा कि एक पीड़ित की मां कूड़ा उठाती है, जबकि उसके बेटे ने उसके खिलाफ केस दर्ज होने और उसकी गिरफ्तारी के बाद डेढ़ लाख की बाइक खरीदी। साथ ही उसके पास महंगा मोबाइल है। उसने कहा कि उसकी गिरफ्तारी के अगले ही दिन उस पर आरोप लगाने वाले बच्चों के पास महंगी बाइक और मोबाइल कहां से आए?
बुरा वक्त है टल जाएगा
सजा सुनाए जाने से पहले जुल्फिकार ने कहा कि जुल्फिकार खान जिंदा है और जिंदा रहेगा। कुछ लोगों की साजिश के कारण उसका बुरा वक्त आया, लेकिन जल्द ही बुरा वक्त टल जाएगा और अच्छा वक्त लौटकर आएगा। उस वक्त सब ठीक हो जाएगा।
तब लोग उसे फिर से पहले की तरह सलाम करेंगे। हालांकि उसने अपने एनजीओ के बंद होने पर अफसोस जताया और कहा कि उसने 24 साल इसमें लगा दिए और आज इसका हाल देख दुख हो रहा है। कुछ लोगों ने उसके एनजीओ का पूरा सामान लूट लिया।
जेल जाने के बाद हुआ धार्मिक
पुलिस सूत्रों के अनुसार जुल्फिकार जब से जेल में आया है तब से धार्मिक बन गया है। हालांकि शुरुआत में कुछ कैदियों ने उससे मारपीट की थी। इसके बाद उसे अदालत के आदेश पर अलग बैरक दिया गया था। इसके बाद से वक्त दर वक्त वह शांत हो गया और धार्मिक किताबें पढ़ने लगा। आज भी उसका अधिकतर वक्त कुरान या अन्य धार्मिक किताबें पढ़ने में लगाता है। कभी-कभी तो रात दो बजे तक किताब पढ़ता है।
सजा के बाद तनाव में आए जुल्फिकार ने कोर्ट रूम के बाहर नुक्कड़ नाटक की तरह ड्रामा किया। उसने उसे जेल भिजवाने वाले पीड़ित बच्चों की कथित उम्र प्रमाण पत्र के दस्तावेज दिखाने का प्रयास किया। साथ ही सवाल उठाए कि जिनका जन्म वर्ष 1992 का है क्या यह बच्चे हैं।
उसने कहा कि एक पीड़ित की मां कूड़ा उठाती है, जबकि उसके बेटे ने उसके खिलाफ केस दर्ज होने और उसकी गिरफ्तारी के बाद डेढ़ लाख की बाइक खरीदी। साथ ही उसके पास महंगा मोबाइल है। उसने कहा कि उसकी गिरफ्तारी के अगले ही दिन उस पर आरोप लगाने वाले बच्चों के पास महंगी बाइक और मोबाइल कहां से आए?
बुरा वक्त है टल जाएगा
सजा सुनाए जाने से पहले जुल्फिकार ने कहा कि जुल्फिकार खान जिंदा है और जिंदा रहेगा। कुछ लोगों की साजिश के कारण उसका बुरा वक्त आया, लेकिन जल्द ही बुरा वक्त टल जाएगा और अच्छा वक्त लौटकर आएगा। उस वक्त सब ठीक हो जाएगा।
तब लोग उसे फिर से पहले की तरह सलाम करेंगे। हालांकि उसने अपने एनजीओ के बंद होने पर अफसोस जताया और कहा कि उसने 24 साल इसमें लगा दिए और आज इसका हाल देख दुख हो रहा है। कुछ लोगों ने उसके एनजीओ का पूरा सामान लूट लिया।
जेल जाने के बाद हुआ धार्मिक
पुलिस सूत्रों के अनुसार जुल्फिकार जब से जेल में आया है तब से धार्मिक बन गया है। हालांकि शुरुआत में कुछ कैदियों ने उससे मारपीट की थी। इसके बाद उसे अदालत के आदेश पर अलग बैरक दिया गया था। इसके बाद से वक्त दर वक्त वह शांत हो गया और धार्मिक किताबें पढ़ने लगा। आज भी उसका अधिकतर वक्त कुरान या अन्य धार्मिक किताबें पढ़ने में लगाता है। कभी-कभी तो रात दो बजे तक किताब पढ़ता है।