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जयंती पर विशेषः भगत सिंह से जुड़े वो 8 सच, न कभी सुने होंगे न कहीं पढ़ें होंगे

Fri, 28 Sep 2018 11:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 28 Sep 2018 11:35 AM IST
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bhagat singh jayanti: secrets of shaheed e azam bhagat singh
bhagat singh - फोटो : फाइल फोटो
आज महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह का जन्मदिवस है। इस मौके पर हम आपको भगत सिंह से जुड़े कई ऐसे अनसुने सच बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपने कभी न सुना होगा और न ही पढ़ा होगा।
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भगत सिंह

आठ वर्ष की खेलने की उम्र में जब बच्चों को खिलौनों का शौक होता है, भगत सिंह अपने पिता से पूछते थे कि अंग्रेजों को भगाने के लिए क्यों न खेतों में पिस्तौले उगा ली जाएं। पिस्तौलों की जो फसल उगेगी उससे अंग्रेजों को आसानी से भारत से भगाया जा सकेगा। उस दौर में पंजाब में अराजकता का माहौल था। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग की घटना हुई तो उस समय भगत सिंह मात्र 12 वर्ष के थे। 

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bhagat singh - फोटो : सोशल मीडिया

1928 में साइमन कमीशन के बहिष्कार के लिए हो रहे प्रदर्शन में हुए लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गयी। इस का बदला लेने के लिए 17 दिसंबर 1928 को करीब सवा चार बजे एएसपी सॉण्डर्स के आते ही राजगुरु ने एक गोली सीधी उसके सिर में मारी। इसके बाद भगत सिंह ने 3-4 गोली दाग दीं। ये दोनों जैसे ही भाग रहे थे कि एक सिपाही चनन सिंह ने इनका पीछा करना शुरू कर दिया। चन्द्रशेखर आज़ाद ने उसे सावधान किया - "आगे बढ़े तो गोली मार दूंगा।" नहीं मानने पर आजाद ने उसे गोली मार दी। इस तरह इन लोगों ने लाला लाजपत राय की मौत का बदला ले लिया।

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शहीद भगत सिंह

भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को पंजाब प्रान्त के लायलपुर जिले के बंगा गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में हैं । महज 12 साल की उम्र में बगैर किसी को बताए भगत सिंह जलियांवाला बाग चले गए थे और वहां की मिट्टी लेकर घर लौटे थे। भगत सिंह के पिता किशन सिंह चाचा अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके पिता और चाचा गदर पार्टी के मेंबर थे। भगत सिंह करतार सिंह सराभा को अपना आदर्श मानते थे। जानकारों के मुताबिक भगत सिंह के जीवन में पहला निर्णायक मोड़ 1919 में आया जब उनकी उम्र करीब 12 साल थी।

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भगत सिंह

भगत सिंह की पढ़ाई लाहौर के डीएवी हाई स्कूल में हुई। वे कई भाषाओं में पारंगत थे। अंग्रेजी, हिन्दी, उर्दू के अलावा पंजाबी पर भी उनकी खास पकड़ थी। कालेज में भगत सिंह ने इंडियन नेशनल यूथ आर्गेनाइजेशन का गठन किया। अच्छे थियेटर आर्टिस्ट के साथ-साथ उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड भी बढ़िया रहा। बाद में भगत सिंह ने अपनी थियेटर की कलाओं को भारतीयों के बीच देशभक्ति की भावनाएं जगाने में किया। भगत सिंह ने एक क्रांतिकारी लेखक का भी रोल अदा किया।

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