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नेकचंद और रॉक गार्डन का पाकिस्तान से खास कनेक्शन, शायद ही कोई जानता हो

Fri, 15 Dec 2017 10:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 15 Dec 2017 10:58 AM IST
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rock garden creator nekchand pakistan connection
पद्मश्री नेकचंद और उनके बेटे अनुज सैनी
जंगल में कबाड़ और पत्थरों से बनी नेकचंद की खूबसूरत दुनिया का पाकिस्तान से खास कनेक्शन है, जो अब खुलकर सामने आया है। शायद ही कोई जानता हो।
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रॉक गार्डन चंडीगढ़ के निर्माता नेकचंद - फोटो : फाइल फोटो
खुलासा किया है सिविल सर्विसेज से रिटायर्ड वीपी मेहता ने। इसका जिक्र उन्होंने अपनी पुस्तक रॉक गार्डन ए विजन ऑफ क्रिएटिविटी में भी किया है। मेहता ने बताया कि रॉक गार्डन की कलाकृतियां पाकिस्तानी पंजाबी कल्चर की झलक बयां करती हैं। वे कहते हैं कि नेकचंद ने पाकिस्तान प्रेम और वहां की पंजाबी संस्कृति को अपनी कलाकृतियों में भी सहेजा।
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नेकचंद एक्सीलेंस अवार्ड - फोटो : फाइल फोटो
इन कलाकृतियों में नेकचंद ने अपने गांव बेरिया कलां के बैसाखी पर आयोजित मेले की एक्टीविटी को संजोया है। छोटी-छोटी बतखें, बंदर, मिट्टी के बर्तन, झूले, चूड़ियां, गुडिया, सपेरा, कुंआ व ऊंट के माध्यम से उन्होंने बैसाखी के मेले और अपने गांव को दर्शाया है। नेक चंद जब पीडब्ल्यूडी में इंस्पेक्टर थे तो उन्होंने लाहौर किले के कांसेप्ट पर ही रॉक गार्डन फेज वन में छतरी वाला गुंबद बना दिया था।
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पद्मश्री नेकचंद की पहली पुण्यतिथि - फोटो : amar ujala
वीपी मेहता बताते हैं कि नेक चंद भले ही भारत-पाक बंटवारे के बाद जम्मू आ गए थे, मगर बंटवारे का दर्द उन्हें हमेशा सताता था। उनका अपने गांव बेरिया कलां से इतना लगाव था कि एक बार जब उन्हें पाकिस्तान जाने का मौका मिला तो उनसे पूछा गया कि आप क्या देखना पसंद करेंगे। उन्होंने झट से कहा, अपना गांव। जब उन्हें वहां ले जाया गया तो उन्हें सिर्फ मस्जिद ही बची दिखी।
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रॉक गार्डन चंडीगढ़ के निर्माता नेकचंद - फोटो : फाइल फोटो
नेकचंद वहां से मिट्टी लेकर आए और रॉक गार्डन में लगे नीम के पेड़ की जड़ों में डाल दी। वीपी मेहता ने बताया कि एक दिन नेक पंचकूला गए। वहां उनकी नजर कौशल्या नदी में पड़े रंग-बिरंगे पत्थरों पर पड़ी। ये पत्थर पिंजौर गार्डन में बने मंदिरों के थे। क्योंकि मंदिर को जब तोड़ा गया तो कुछ हिस्सा जमीन में धंस गया और बचे बड़े पत्थरों को नदी में बहा दिया गया।
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