कभी जूते खरीदने को नहीं थे पैसे, अब मिला पद्मश्री, पढ़ें लंग कैंसर से बचाने वाले डॉ. की कहानी
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पद्मश्री की घोषणा हो और पीजीआई चंडीगढ़ की झोली में पुरस्कार न आए, ऐसा हो नहीं सकता। इस बार पल्मोनरी डिपार्टमेंट के पूर्व एचओडी व प्रो. डी. बेहरा को पद्मश्री अवार्ड से नवाजा जाएगा। उनके नाम की घोषणा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हुई है। सांस के रोग, लंग्स कैंसर और टीबी के क्षेत्र में उन्होंने काफी काम किया है।
बेहद गरीब परिवार से आने वाले डॉ. बेहरा का बचपन बहुत मुश्किलों से बीता है। उनके माता-पिता अनपढ़ थे लेकिन बेटों को पढ़ा-लिखाकर बड़ा व्यक्ति बनाने का उनमें जुनून था। डॉ. बेहरा बताते हैं कि वे इतने गरीब थे कि हाईस्कूल की पढ़ाई तक उनके पास जूते नहीं थे। गांव से पढ़ाई करने के बाद जब वे शहर आए तब जाकर उन्हें जूते मिले।
मूलरूप से ओडिशा के रहने वाले डॉ. बेहरा बताते हैं कि वे साल 1978 में पीजीआई में परीक्षा देने आए थे। उस वक्त काफी ठंड पड़ रही थी। उनके पास कोट भी नहीं था। परीक्षा के दौरान वे अपने जूनियर का कोट पहनकर आए थे। जब वे पीजीआई आए तो उनकी किस्मत पलट गई।
मेहनत के बल पर वे आगे बढ़ते चले गए। टीबी पर बेहतरीन कार्य करने पर उन्हें कई अवार्ड मिल चुके हैं। इस पर वे कहते हैं कि वे मामूली टीबी वर्कर हैं। डॉ. बेहरा पीजीआई से रिटायर्ड हो चुके थे लेकिन पीजीआई और डिपार्टमेंट की सिफारिश पर उन्हें भारत सरकार ने दो साल का एक्सटेंशन दिया है। इस समय वे पीजीआई में कार्यरत हैं।
अब्दुल कलाम से दो बार मिल चुका है सम्मान
डॉ. डी बेहरा की प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उन्हें पूर्व राष्ट्रपति व वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कलाम से दो बार अवार्ड मिल चुका है। जब उन्हें दोबारा अवार्ड मिला तो राष्ट्रपति कलाम ने उनसे काफी बातें कीं और उनके बारे में जानकारी हासिल की। उन्हें तीन बार आईसीएमआर अवार्ड मिल चुका है।
डॉ. बेहरा को अभी तक 28 से ज्यादा राष्ट्रीय और 7 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय अवार्ड मिल चुका है। 475 से ज्यादा पेपर प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी पल्मोनरी मेडिसिन पर लिखी टेक्स्ट बुक हजारों स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं। 1980 से वह पीजीआई में लंग कैंसर क्लीनिक चला रहे हैं। नेशनल टीबी सेंट्रल प्रोग्राम के चेयरमैन भी रहे हैं।
मुझे पीजीआई ने बहुत कुछ दिया है। पीजीआई एक समंदर है, जितना उसमें डूबेंगे, उतना ज्ञान आपको मिलेगा। इस अवार्ड के लिए मैं पीजीआई, अपने सहकर्मी और मरीजों का आभार व्यक्त करता हूं। -प्रो. डी बेहरा, पूर्व एचओडी पल्मोनेरी डिपार्टमेंट चंडीगढ़
यह पीजीआई के लिए बहुत बड़ा सम्मान है। डॉ. बेहरा ने लंग्स कैंसर पर काफी काम किया है। उनकी बदौलत संस्थान का पल्मोनरी डिपार्टमेंट आज ऊंचाइयों पर है। न सिर्फ भारत में बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर इस डिपार्टमेंट की अपनी एक साख है। -प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई