पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नवांशहर के खटकड़कलां गांव में शपथ ग्रहण किया था। इस गांव का नाता शहीद भगत सिंह से है। यह उनका पैतृक गांव है। हालांकि भगत सिंह वैसे कभी खटकड़कलां नहीं आए, क्योंकि आजादी से पहले उनका परिवार पाकिस्तान चला गया था। मगर एक बार चाचा अजीत सिंह को ढूंढते नवांशहर के कस्बा जाडला जरूर पहुंचे थे। उन्हें कहीं से पता चला था कि चाचा का पता गदर पार्टी के पास हो सकता है। यही वजह है कि उन्होंने गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से माधो राम (कैशियर) जो सेन फ्रांसिस्को में थे, से संपर्क साधने के लिए कस्बा जाडला का रुख किया था।
शहीद दिवस: इस वजह से भगत सिंह को दोस्त संग छोड़ना पड़ा था गांव, पढ़ें- शहीद-ए-आजम से जुड़ी अनकही बातें
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माधोराम भगत सिंह के बचपन के सहपाठी व दोस्त अमरचंद लखनपाल के पिता थे। यहां लायलपुर के बंगा गांव के लखनपाल के परिवार के सदस्य रहते थे। यहां अमरचंद लखनपाल नहीं बल्कि उनकी मां लाजवंती उन्हें मिलीं। इस बात का जिक्र शहीद भगत सिंह ने अपने पत्र में भी किया है, जो उन्होंने अमेरिका में पढ़ रहे अपने सहपाठी अमरचंद को लिखा था। वही पत्र अभी तक परिवार ने अपने पास संभाल कर रखा है। हालांकि परिवार के पास शहीद भगत सिंह व स्वर्गीय अमरचंद की दोस्ती से जुड़े कई किस्से हैं, जिन्हें परिवार ने संजोकर रखा है।
लायलपुर के चक्क बंगा गांव में इकट्ठे रहते थे दोनों परिवार
जाडला निवासी स्वर्गीय अमर चंद लखनपाल के बेटे राजिंदर लखनपाल ने बताया कि उनका परिवार चक्क बंगा 105 (पाकिस्तान के जिला लायलपुर) में रहा करता था। उनकी एक रिहायश जाडला में भी थी। उनके पिता अमरचंद व भगत सिंह एक ही स्कूल में पढ़ा करते थे। जैतों के मोर्चे के दौरान अप्रैल 1924 में लायलपुर से श्री अमृतसर के लिए रवाना हुए शहीदी जत्थे को गांव बंगा में भगत सिंह और अमरचंद ने लंगर छकाया था। गांव के ही एक शख्स ने अंग्रेज सरकार से उनकी मुखबिरी कर दी जिस वजह से उन्हें गांव छोड़कर भागना पड़ा। यह भगत सिंह के साथ उनके पिता की आखिरी मुलाकात थी। इसके बाद मेरे दादा माधोराम ने पिता अमरचंद को पढ़ाई के लिए अमेरिका बुला लिया।
इस बार खटकड़कलां में कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं होगा
शहीद-ए-आजम भगत सिंह के शहीदी दिवस पर 23 मार्च को खटकड़कलां में इस बार कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं होगा। नई सरकार द्वारा कुछ दिन पहले खटकड़कलां में किए गए शपथ ग्रहण समारोह के चलते इस बार मौजूदा प्रदेश सरकार द्वारा कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं किया जा रहा। इसके अलावा दूसरे दल भी कोई कार्यक्रम नहीं कर रहे हैं। सिर्फ वामदलों से जुड़े 1-2 संगठन अपने मंच लगाएंगे। हालांकि जिला प्रशासन ने सीएम भगवंत मान के अचानक दौरे की संभावना को देखते हुए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
बच्चों के खेलने के लिए नहीं है कोई मैदान: सरपंच कुलविंदर कौर
शहीद-ए-आजम भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़कलां में सरकार ने 18 करोड़ रुपये में म्यूजियम बनाया है। इसके अलावा गांव में एक आदर्श स्कूल बनाया गया है। गांव की स्ट्रीट लाइट सोलर से चलने वाली हैं और शहीद के पैतृक घर से आगे एक शानदार पार्क बनाया गया है। गांव की सरपंच कुलविंदर कौर ने बताया कि गंदे पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं है और खेल का मैदान भी नहीं है। उन्होंने कहा कि नई सरकार से उन्हें उम्मीद है कि ये दोनों मुद्दों को पहल के आधार पर हल किया जाएगा।