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पति-पत्नी के संबंधों पर हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, पर बड़ा झटका देगा

Mon, 26 Feb 2018 02:54 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 26 Feb 2018 02:54 PM IST
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punjab haryana highcourt historical decision on husband wife relationship
couple
पति और पत्नी के संबंधों को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा ही ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसे पढ़कर किसी को झटका लगेगा और किसी को राहत मिलेगी।
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पहली पत्नी से तलाक लिए बिना पुरुष से शादी करने वाली दूसरी पत्नी पहली के जीवित रहते गुजारा भत्ते पाने की हकदार नहीं है। हालांकि दूसरी पत्नी से पैदा हुई अविवाहित संतान भत्ते की हकदार जरूर होगी। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की जस्टिस जय श्री ठाकुर ने यह फैसला दूसरी पत्नी द्वारा गुजारा भत्ता के लिए दाखिल की गई याचिका को खारिज करते हुए दिया।

 
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रोहतक में एक तांत्रिक की सलाह पर महिला ने अपनी बड़ी बहन के पति से शादी कर ली थी। पहला बच्चा विकृति के साथ पैदा हुआ था तो तांत्रिक ने उसे सलाह दी थी कि यदि वह दूसरा विवाह कर ले तो बच्चा सामान्य पैदा होगा। इसके बाद उसने बहन के पति से शादी कर ली। इस शादी के चलते उसे एक बेटी पैदा हुई। इस सब के बाद महिला ने गुजारा भत्ता के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।
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याचिका दाखिल करते हुए महिला ने कहा कि उसने बाकायदा शादी की है और इस नाते वह प्रतिवादी की पत्नी है और उससे गुजारा भत्ता की पूरी तरह से हकदार है। जस्टिस ठाकुर ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 में ‘पत्नी’ को परिभाषित नहीं किया गया है। यदि हम इसकी परिभाषा अन्य कानूनों में या सामाजिक तौर पर भी देखें तो कानूनी रूप से विवाहित पत्नी के अतिरिक्त किसी भी महिला को पत्नी नहीं माना जा सकता।
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हिंदू विवाह कानून की धारा 5 में बताया गया है कि यदि दोनों में से किसी का भी जीवनसाथी जीवित नहीं है, तो वे किसी दूसरे से शादी कर सकते हैं। इस प्रकार कोई भी विवाह जिसमें इस प्रावधान का उल्लंघन किया गया है, वह अमान्य होगा। जस्टिस ठाकुर ने कहा कि यहां याचिकाकर्ता वह दूसरी पत्नी है, जो यह जानते हुए भी विवाह करती है कि पुरुष की पहली पत्नी जीवित है और उसने उससे तलाक भी नहीं लिया है। इसलिए वह धारा 125 के तहत तो गुजारा भत्ते ही हकदार नहीं है।
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