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'बुजुर्गों को बच्चों के हाथों जलील होने को नहीं छोड़ सकते', सबक सिखाती केस हिस्ट्री

Sat, 29 Jul 2017 12:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 29 Jul 2017 12:25 PM IST
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punjab haryana highcourt historical decision in case of care of parents
बुजुर्गों का सम्मान - फोटो : zokudo
जिंदगी के आखिरी दौर में बुजुर्ग मां बाप को बच्चों के हा​थों जलील होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। हर किसी को ये केस हिस्ट्री जरूर पढ़नी चाहिए, जिंदगी का एक सबक सिखाती है। 
punjab haryana highcourt historical decision in case of care of parents
senior citizens
72 वर्षीय विधवा महिला को परेशान व जलील करने वाले बेटे-बहू को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया है। दोनों ने याचिका दाखिल करते हुए डीएम केआदेशों को चुनौती देते हुए घर से न निकाले जाने की अपील की थी। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए साफ कर दिया कि जिंदगी के आखिरी दौर में सीनियर सिटीजन को उनके बच्चों के हाथों जलील होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। इसलिए बेटे और बहू को मकान खाली करना होगा। 
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senior citizen - फोटो : अमर उजाला
मामले में याचिका दाखिल करते हुए सीनियर सिटीजन महिला के बेटे, बहू व तीन नाबालिग बच्चों की ओर से डीसी के आदेशों को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया कि 1 जून 2017 को डीसी चंडीगढ़ ने उनकी मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें मकान खाली करने के आदेश दिए थे। याचिकाकर्ता ने कहा कि मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 के तहत डीसी को उनकी मां की अपील सुनने का अधिकार नहीं था।
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Court
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ऐसी अपील की सुनवाई केवल ट्रिब्यूनल ही कर सकता है, लेकिन यहां डीसी ने ऐसा किया। इसलिए उसने डीसी के फैसले के खिलाफ अपील की है। याची ने कहा कि उनके पिता की मौत 2005 में हो गई थी और उससे पहले याची दुबई में था। जिस प्रॉपर्टी से उन्हें निकाला गया है, उसके निर्माण के लिए वह दुबई से पैसा भेजता था। यह दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
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court
हाईकोर्ट ने वादी और प्रतिवादी पक्ष को सुनने के बाद याचिकाकर्ता की यह दलील खारिज कर दी कि इस मामले की डीसी सुनवाई नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य को यह शक्ति होती है कि वह इन मामलों की सुनवाई के लिए डीसी को अधिकृत करें। इसके साथ ही ट्रिब्यूनल के पास वह मामले जाते हैं जहां सीनियर सिटीजन अपनी प्रॉपर्टी को वापिस लेने के लिए तथा मेंटेनेंस के लिए याचिका दाखिल करते हैं। 
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