देश के एक चीफ जस्टिस ऐसे, जिन्होंने न्याय की दुनिया को जिंदगी के 38 साल दिए और अब 'अनोखी' पर बेहद शानदार रिटायरमेंट ली।
ये हैं पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार, जिन्होंने रिटायरमेंट के मौके पर बतौर जज प्रोफेशनल जीवन की शुरुआत का ऐसा किस्सा सुनाया, सुनकर सभी हैरान रह गए। वजीफदार को रिटायरमेंट के मौके पर वीरवार को पारंपरिक ढंग से शानदार विदाई दी गई। विदाई समारोह के बाद चीफ जस्टिस जब हाईकोर्ट परिसर से निकलने लगे तो उन पर फूलों की बारिश की गई। फूल मालाएं पहनाकर कर उनका सम्मान किया गया।
साथ ही सभी जजों ने हाईकोर्ट से निकलते समय उनकी गाड़ी को धक्का देकर आगे बढ़ाया। दरअसल पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की परंपरा है कि चीफ जस्टिस के रिटायर होने पर सभी जज सम्मान स्वरूप उनकी गाड़ी को धक्का देकर विदा करते हैं। सालों से इस परंपरा का निर्वाह किया जा रहा है। विदाई के दौरान हाईकोर्ट के सभी जज, वकील और कर्मचारी उनके सम्मान में परिसर में इकट्ठे हो गए थे।
चीफ जस्टिस ने हाथ जोड़कर सभी का धन्यवाद किया और इस सम्मान के लिए सभी का शुक्रिया अदा कियाया। उन्होंने कहा कि इतना सम्मान और प्यार पाकर वह खुद को बेहद गदगद हैं। जस्टिस एसजे वजीफदार की फैमिली भी इस दौरान उनके साथ मौजूद थी। विदाई समारोह के दौरान चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार ने एक रोचक वाकया बताकर सबको चौंका दिया।
उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में ज्वाइनिंग से पहले दो बार सिक्योरिटी गार्डों ने उन्हें हाईकोर्ट परिसर में घुसने से रोक दिया था। वह यहां टूरिस्ट बनकर हाईकोर्ट देखने आए थे। समारोह के दौरान चीफ जस्टिस वजीफदार ने चंडीगढ़ हाईकोर्ट से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक्टिंग चीफ जस्टिस का पदभार संभालने के लिए चंडीगढ़ आए थे तो उनकी इच्छा ज्वाइन करने से पहले हाईकोर्ट देखने की हुई।