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गर्मी में बेहाल छतबीड़ के जानवर, कहीं बर्फ की सिल्ली, किसी को कूलर

Sun, 01 May 2016 08:02 PM IST
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, जीरकपुर
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, जीरकपुर Updated Sun, 01 May 2016 08:02 PM IST
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Preparation of relief to Chhatbir Zoo animals in summer
छतबीड़ जू - फोटो : amar ujala

गर्मी से बेहाल हो चुके छतबीड़ के जानवरों के लिए जू प्रबंधन ने जानवरों को ठंडक का अहसास देने के लिए कहीं बर्फ की सिल्ली रखवा दी गई है तो कहीं स्प्रिंकल्स फिट करवाए हैं। इतना ही नहीं, रेंज अफसरों को आदेश दिए गए हैं कि बाड़े में बने छोटे पौंड के पानी को जल्दी-जल्दी बदला जाए, जिससे जानवर गर्म पानी में न रहें और पानी की गंदगी के कारण जानवरों को बीमारी न होने पाए। इस बार पौंड के पानी में विटामिन और मिनरल मिलाए गए हैं, जिससे जानवर स्वस्थ रहेंगे। जानवरों को खाने में ऐसे फल दिए जा रहे हैं, जिससे उनके शरीर में पानी की कमी नहीं होगी।

Preparation of relief to Chhatbir Zoo animals in summer
छतबीड़ जू - फोटो : amar ujala

छतबीड़ जू में भालुओं के लिए बर्फ की सिल्ली का इंतजाम किया गया है। बर्फ की सिल्ली भालू के बाड़े में पीछे रखवाई जाती है जैसे ही सूरज चढ़ता है वैसे ही भालू बाड़े के पीछे बने कमरे में आ जाता हैं। इसके साथ ही टाइगर के बाड़े में स्प्रिंकल का इंतजाम किया गया है। इस स्प्रिंकल से लगातार पानी की फुहार निकलती रहेगी, जिससे टाइगर को गर्मी नहीं लगेगी। टाइगर के बाड़े में बनाए गए पौंड में भी ताजे पानी का इंतजाम किया गया है। इसके साथ ही जानवरों के रेस्ट रूम में कूलरों का इंतजाम किया गया है। हाथी के बाड़े में पानी का भरपूर इंतजाम किया गया है।

Preparation of relief to Chhatbir Zoo animals in summer
छतबीड़ जू - फोटो : amar ujala

छतबीड़ जू में हिरण के लिए फूस की झोपड़ी तैयार की गई है, जिसमें वह रेस्ट कर सकेंगे। हिमालयन भालू, स्लॉथ भालू, सफेद एवं साधारण रॉयल बंगाल टाइगर्स, एशियन शेर, तेंदुआ व बाघ के घरों में प्रति जानवर बर्फ की सिल्लियां बड़े टुकड़ों में डाली जा रही हैं। इनके घरों के सामने एयर कूलर भी लगाए गए हैं। बर्फ को छूती कूलर की हवा एयर कंडीशनर के माफिक हाउस को ठंडा रखती है। उधर पक्षियों के पिंजरों को हरे रंग की चादर से कवर कर दिया गया है। इससे धूप सीधे उनके ऊपर न पड़े।

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छतबीड़ जू - फोटो : amar ujala

दुर्लभ पक्षियों के पिंजरों को छत समेत आसपास से हरे रंग की 75 फीसदी घनत्व वाली एग्रोनेट चादर से ढका जा रहा है। इस चादर में सुराख रहने से धरती की गर्मी नहीं पहुंची है। मच्छरों से मुक्त माहौल के लिए जानवरों के घरों की सभी खिड़कियों को जालियों से ढक दिया गया है। हिमालयन भालू बर्फीली क्षेत्र के होते हैं, जहां अधिकतम तापमान मुश्किल से 5 डिग्री सेल्सियस तक होता है। जू में खुद को ठंडा रखने के लिए इन भालुओं का लेटना और बैठना बर्फ की सिल्लियों पर होता है। प्यास बुझाने के लिए पानी की बजाय ये भालू बर्फ चबा जाते हैं। गर्मी बढ़ने पर इनके तालाब में भी कभी-कभार बर्फ की सिल्लियां डालनी पड़ती हैं।

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छतबीड़ जू - फोटो : amar ujala

मनीष कुमार, फील्ड डायरेक्टर, छतबीड़ जू ने बताया कि ताजे और ठंडे पानी के दो टैंकर दिनभर गश्त लगाकर पानी की सप्लाई करते हैं। गर्मी के मौसम में झील और पार्क में पानी की कमी पूरी करने के लिए नलकूप है, जबकि तीन नलकूप पहले से पानी सप्लाई कर रहे हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा पानी की सप्लाई अलग से की गई है। सफेद टाइगर के बाड़े में मौजूद तालाब का पानी गर्म न हो, इसके लिए तालाबों पर एग्रोनेट की छत डाली जा रही है। 

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