{"_id":"584c0cd54f1c1b243444acd5","slug":"pm-modi-note-ban-decision-broke-the-dream-to-collect-786-number-notes","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी से इनको लगा है बड़ा झटका, कोई क्राइम नहीं किया फिर भी रोए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोटबंदी से इनको लगा है बड़ा झटका, कोई क्राइम नहीं किया फिर भी रोए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 24 Dec 2016 01:50 AM IST
विज्ञापन
786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी को 32 दिन हो गए है, जिन्होने काला धन रखा था वो तो रो ही रहें है लेकिन इनसे मिलिए इन्होने कोई क्राइम नहीं किया फिर भी हालत खराब है।
786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
दरअसल ये वो लोग है, जिन्होने 1000-500 के फैन्सी नंबरों के नोट को जमा किया था। सेक्टर-50 के नरिंदर पाल सिंह 1989 से 786 नंबर के नोट जमा कर रहे हैं। उनके पास इन नोटों की ढेरों कलेक्शन हैं।
786 नंबर वाले करीब साढ़े 14 लाख रुपए के नोट वे जमा कर चुके हैं। लेकिन इस रिकॉर्ड में से साढ़े 3 लाख रुपए की करंसी अब उनके लिए किसी काम की नहीं रही। उनके पास 786 नंबर वाले 500 रुपए के 400 से ज्यादा नोट हैं, जबकि 1000 के उनके पास 130 नोट।
786 नंबर वाले करीब साढ़े 14 लाख रुपए के नोट वे जमा कर चुके हैं। लेकिन इस रिकॉर्ड में से साढ़े 3 लाख रुपए की करंसी अब उनके लिए किसी काम की नहीं रही। उनके पास 786 नंबर वाले 500 रुपए के 400 से ज्यादा नोट हैं, जबकि 1000 के उनके पास 130 नोट।
786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
पंजाब स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक से रिटायर नरिंदर पाल ने बताया कि बैंक में काम करते-करते उन्हें ये शौक पड़ा था। उनके पास कई लोग 786 नंबर वाले नोट मांगने आते थे। फिर उन्हें भी शौक पड़ा और उन्होंने कलेक्शन शुरू कर दी। 2001 में पहली बार उनके रिकॉर्ड को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह मिली। फिर उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में आया।
विज्ञापन
विज्ञापन
786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
लुधियाना में हीरो डी.एम.सी. हार्ट इंस्टीच्यूट में बिलिंग सुपरवाइजर के पद पर काम कर रहे विनोद सिंह नेगी को 500 व 1 हजार के नोट बंद करने की घोषणा मानो बिजली के झटके की तरह लगी हो। क्योंकि कई वर्षों से उसने 500 व 1000 रुपए के नोट जिनकी सीरीज के आखिर में 786 छपा था, एकत्रित किए थे।
उसके इस शौक में उसके दोस्तों ने भी मदद की, जिसके चलते उसके पास 1000 के 68 व 500 रुपए के 91 नोट (कुल रकम 1 लाख 13 हजार) जमा हो चुके थे।
उसके इस शौक में उसके दोस्तों ने भी मदद की, जिसके चलते उसके पास 1000 के 68 व 500 रुपए के 91 नोट (कुल रकम 1 लाख 13 हजार) जमा हो चुके थे।
विज्ञापन
लुधियाना में श्रीसाईं फाइनेंस कंपनी के मालिक करण वालिया को 786 नंबर वाले 500 और 1000 के नोट एकत्र करने का शौक था। इसके चलते वालिया को जब भी कहीं से 786 नंबर वाला नोट मिलता था, तो वह उसे अपने ही रख लेते थे। इस तरह वह पिछले करीब पंद्रह वर्षों से 500 और 1000 के नोट एकत्र कर साढ़े तीन लाख रुपए जमा कर चुके हैं।
लुधियाना में श्रीसाईं फाइनेंस कंपनी के मालिक करण वालिया को 786 नंबर वाले 500 और 1000 के नोट एकत्र करने का शौक था। इसके चलते वालिया को जब भी कहीं से 786 नंबर वाला नोट मिलता था, तो वह उसे अपने ही रख लेते थे। इस तरह वह पिछले करीब पंद्रह वर्षों से 500 और 1000 के नोट एकत्र कर साढ़े तीन लाख रुपए जमा कर चुके हैं।