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मां मैंनू मारी ना..एक मजबूर मां की दास्तां

Mon, 18 Aug 2014 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 18 Aug 2014 12:51 AM IST
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मां मैंनू मारी ना..एक मजबूर मां की दास्तां

Play against feticide: story of helpless mother

प्रसिद्ध कवि और लेखक शब्दीश के भ्रूण हत्या के खिलाफ नाटक ‘चिड़ी दी अंबर वल उड़ान’ का सौवां मंचन रविवार शाम पंजाब कला भवन में हुआ। अनीता शब्दीश की उम्दा अदाकारी देख दर्शकों की पलकें भीग गईं।


मां मैंनू मारी ना..एक मजबूर मां की दास्तां

Play against feticide: story of helpless mother

एक मजबूर मां की दास्तां: कोख में बेटी पल रही है। परिवार के दबाव में मां मजबूर है। मंच पर गर्भपात का दृश्य है। नेपथ्य से कविता गूंजती है- मां मैंनू मारी ना, मैं तेरे तों तेरी लोरी वी न मंगांगी। और दर्शकों की पलकें भीग जाती हैं।

मां मैंनू मारी ना..एक मजबूर मां की दास्तां

Play against feticide: story of helpless mother

‘चिड़ी दी अंबर वल उड़ान’ नाटक डॉ. गुरमिंदर सिद्धू की कविताओं पर आधारित था। इस एकांकी नाटक में मुख्य भूमिका में थिएटर आर्टिस्ट अनीता शब्दीश थीं। उन्होंने ही नाटक का निर्देशन भी किया।

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मां मैंनू मारी ना..एक मजबूर मां की दास्तां

Play against feticide: story of helpless mother
नाटक की कहानी इसका मजबूत पक्ष था। कविताओं को बड़ी खूबसूरती से पिरोया गया। लाइट्स इफेक्ट भी बेहतरीन रहे। सेट पर कैनवास में जाले बुन गए और उनपर कलीरें लटकाई गईं।
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मां मैंनू मारी ना..एक मजबूर मां की दास्तां

Play against feticide: story of helpless mother

डॉ. गुरमिंदर सिद्धू की कविताओं पर आधारित नाटक पर थिएटर आर्टिस्ट अनीता शब्दीश ने उम्दा अदाकारी ‌दिखाईं। अनीता शब्दीश ने ही नाटक का निर्देशन भी किया।

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