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प्लेटलेट्स डोनेट करते समय करते हैं ये गलती तो सावधान, जानलेवा हो सकती है
Tue, 03 Oct 2017 02:12 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 03 Oct 2017 02:12 PM IST
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platelets donation
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अगर आप प्लेटलेट्स डोनेट करते हैं तो सावधान रहें। जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। ये बात जरूर फॉलो करें, वरना लेने के देने पड़ सकते हैं।
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रक्तदान
ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि एक व्यक्ति हफ्ते में दो बार प्लेटलेट्स दे सकता है। जबकि साल में 24 बार। 24 बार से ज्यादा डोनेट करना खतरनाक साबित हो सकता है।
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रक्तदान शिविर
- फोटो : demo pic
ट्राइसिटी में डेंगू के रोज 30-35 नए मरीज दर्ज किए जा रहे हैं। इससे डेंगू सीजन में प्लेटलेट्स की डिमांड काफी बढ़ गई है। समय पर प्लेटलेट्स न मिले तो जान भी जा सकती है। ऐसे में श्री शिव कांवड़ संस्था की प्लेटलेट्स आर्मी लोगों को नया जीवन दे रही है। संस्था ने ऐसे 200 लोगों को तैयार कर रखा है, जो वक्त पड़ने पर किसी को भी प्लेटलेट्स दे सकते हैं। प्लेटलेट्स आर्मी से ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़े इसलिए संस्था अलग-अलग जगहों पर कैंप लगाती है।
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रक्तदान
जब से डेंगू सीजन शुरू हुआ है तो तब से 100 से ज्यादा लोगों को प्लेटलेट्स की मदद पहुंचा चुके हैं। पिछले साल 250 से ज्यादा लोगों को प्लेटलेट्स मुहैया करवाए थे। ट्राइसिटी की यह पहली प्लेटलेट्स आर्मी है और इससे कोई भी जुड़ सकता है। संस्था के प्रेसिडेंट राकेश संगर ने बताया कि ट्राइसिटी में पिछले दो-तीन सालों से डेंगू सीजन काफी बढ़ गया है। इससे प्लेटलेट्स के लिए लोगों को भटकना पड़ता था। उनके पास जो लोग आते थे उनमें से कुछ की मदद हो जाती थी तो कुछ की नहीं।
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रक्तदान
दरअसल सभी लोग ब्लड डोनेट कर दिया करते थे। इससे प्लेटलेट्स डोनेट करने में दिक्कत आती थी। एक बार ब्लड डोनेट करने के बाद तीन महीने बाद ही प्लेटलेट्स दिया जाता है। इसलिए पिछले दो सालों से कुछ लोगों को सिर्फ प्लेटलेट्स के लिए तैयार किया गया है। ये लोग जुलाई से अक्तूबर के बीच ब्लड डोनेट नहीं करते। जिस ब्लड ग्रुप की डिमांड आती है, उस ग्रुप के डोनर को पीड़ित के पास भेज दिया जाता है।
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