मिलिए, जालसाजी की सल्तनत के सुल्तान से, जोड़े 45000 करोड़
पर्ल्स ग्रुप के जिस मालिक ने मात्र 20 साल में 45000 करोड़ जमा कर लिए, उसपर 6 करोड़ लोगों की गाढ़ी कमाई को ठगी के जरिए हड़पने का आरोप है। देखिए, पीछे की कहानी।
मिलिए, जालसाजी की सल्तनत के सुल्तान से, जोड़े 45000 करोड़
PACL यानी पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड का सर्वे सर्वा है निर्मल सिंह। आज से सिर्फ 20 साल पहले ये पंजाब के जिला चमकौर साहिब में साइकिल पर दूध बेचता था, तकिए बेचता था। इसी दौरान वो एक चिट फंड कंपनी में एजेंट बन गया। इसमें माहिर होते ही भंगू ने गुरवंत एग्रोटेक के नाम से कंपनी शुरू कर दी। ये कंपनी मैग्नेटिक पिलोज बेचने के नाम पर लोगों से पैसा जमा कराती थी। 1998 में कंपनी का नाम PACL रखा गया।
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पंजाब का बरनाला निवासी निर्मल ने पहले 70 के दशक में कोलकाता में इनवेस्टमेंट कंपनी पियरलेस में कुछ साल काम किया। हरियाणा की कंपनी गोल्डन फॉरेस्ट में भी काम किया। निवेशकों से करोड़ों ऐंठने के बाद गोल्डन फॉरेस्ट बंद हो गई। इसके बाद निर्मल ने गोल्डन फॉरेस्ट की तरह 1980 में पर्ल्स गोल्डन फॉरेस्ट (पीजीएफ) नाम की कंपनी बनाई। वो कंपनी वृक्षारोपण के लिए निवेशकों से पैसा जुटाती और अच्छे मुनाफे का दावा करती थी।
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साल 1996 तक निर्मल सिंह भंगू प्लांटेशन के लिए लोगों से रुपए लेता और उन्हें मोटे रिटर्न का भरोसा देता रहा। इस दौरान इनकम टैक्स और दूसरी जांचों के चलते निर्मल सिंह ने 80 के दशक में बनाई गई कंपनी पर्ल्स गोल्डन फॉरेस्ट यानी पीजीएफ को बंद कर दिया लेकिन उसे पॉन्जी स्कीम से रुपए कमाने का फॉर्मूला मिल चुका था। लिहाजा उसने एक नई कंपनी बनाई जिसका नाम रखा, PACL यानी पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड।
मिलिए, जालसाजी की सल्तनत के सुल्तान से, जोड़े 45000 करोड़
निर्मल सिंह भंगू ने बरनाला से पॉन्जी स्कीम की शुरुआत की। कमाई के लिए पिरामिड मॉडल अपनाया। शुरु में दो एजेंट बनाएं जिनसे हजार-हजार रुपये लिए और उन्हें ग्राहक लाने पर कमीशन का वादा किया। अगले महीने उन दो एजेंट्स ने दो-दो एजेंट कंपनी के साथ जोड़े। एक महीने बाद 6 एजेंट हो गए। तीसरे महीने 4 एजेंट्स ने 8 नए लोगों को लालच देकर अपने साथ जोड़ लिया। चौथे महीने में उन 8 इनवेस्टर्स ने 16 नए एजेंट तैयार कर लिए।