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सतलुज दरिया कैसे बना आतंकियों का मददगार?

Tue, 12 Jan 2016 09:13 AM IST
Updated Tue, 12 Jan 2016 09:13 AM IST
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सतलुज दरिया कैसे बना आतंकियों का मददगार?

pathankot terror attack, satluj river help terrorist
सरहद की सुरक्षा व्यवस्था में सतलुज दरिया बहुत बड़ी बाधा है। इसी की रास्ते पाकिस्तानी आतंकी और तस्कर बीएसएफ को चकमा देकर घुसपैठ करते हैं। देखिए, कैसे? -रिपोर्ट: अनिल कुमार/फिरोजपुर।

सतलुज दरिया कैसे बना आतंकियों का मददगार?

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सतलुज दरिया कई जगह भारत से पाकिस्तान में प्रवेश करता है, लेकिन वहां फेंसिंग नहीं है। दरिया का बहुत बड़ा हिस्सा पाकिस्तान से होकर भारत में भी प्रवेश करता है और वहां पर सरकंडों के घने जंगल हैं। यही वो रास्ते हैं जहां से आतंकी और तस्कर बीएसएफ को चकमा देकर घुसपैठ करने में कामयाब हो जाते हैं। सरहद और दरिया के साथ ही गांव बसे हैं, जिनके कई लोग तस्करों के साथी हैं।

सतलुज दरिया कैसे बना आतंकियों का मददगार?

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भारत-पाकिस्तान की सीमा पर जहां से सतलुज दरिया पाकिस्तान से भारत में प्रवेश करता है, वहां पर बीएसएफ के लिए रुटीन चौकसी बेहद मुश्किल है। हरीके पत्तन (हरीके हेड) से लेकर फाजिल्का तक दरिया लगभग सात बार पाकिस्तान में प्रवेश कर भारत की सीमा में आता है। हुसैनीवाला बॉर्डर के पास बीएसएफ की पोस्ट सम्मेके के पास पाकिस्तान की तरफ से दरिया भारत में प्रवेश करता है।
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सतलुज दरिया कैसे बना आतंकियों का मददगार?

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यह इलाका काफी बड़ा है और यहां सरकंडों का घना जंगल है। इसके अलावा हुसैनीवाला सेक्टर में ही एक और जगह से दरिया पाकिस्तान से भारत में प्रवेश करता है। यहां भी सरकंडों का जंगल है। गांव मुठियां वाला, हुसैनीवाला, ममदोट और फाजिल्का की तरफ से भी दरिया पाकिस्तान से होकर भारत में प्रवेश करता है। पाकिस्तान में बैठे तस्करों को भी ये सभी रास्ते मालूम हैं।
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सतलुज दरिया कैसे बना आतंकियों का मददगार?

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कई बार इन्हीं रास्तों के जरिए तस्कर हेरोइन की तस्करी कर चुके हैं। कई बार सरहद पार कर पाकिस्तानी नागरिक घुसपैठ कर फिरोजपुर के छावनी रेलवे स्टेशन पहुंच चुके हैं जबकि आईएसआई के एजेंट, आतंकी और तस्करों के लिए सरहद पार करना कोई मुश्किल नहीं है।
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