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'मां...! मेरा इंतजार न करियो, इस बार घर नहीं आ पाऊंगा'

Wed, 06 Jan 2016 12:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला(हरियाणा) Updated Wed, 06 Jan 2016 12:54 PM IST
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'मां...! मेरा इंतजार न करियो, इस बार घर नहीं आ पाऊंगा'

pathankot airbase terror attack martyr gursewak singh profile

पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए एयरफोर्स गरुड़ कमांडो गुरसेवक की मां नहीं जानती थी कि दोपहर जिस बेटे का कुशलक्षेम पूछा है, शाम को शहादत की खबर आ जाएगी। देखिए, पूरा मामला। रिपोर्ट: मोहित धुपड़, अंबाला सिटी

'मां...! मेरा इंतजार न करियो, इस बार घर नहीं आ पाऊंगा'

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एयरफोर्स कमांडो गुरसेवक ने घर पर फोन कर परिजनों का हालचाल पूछा और अपनी भी कुशलक्षेम उन्हे दी। पिता, पत्नी से बातचीत के बाद गुरसेवक ने मां से कहा- ‘मां इस हफ्ते मेरा इंतजार न करियो, शायद में आ नहीं पाऊंगा...। लेकिन गुरसेवक की मां अमरीको को क्या मालूम था कि नियति को कुछ और ही मंजूर है।

'मां...! मेरा इंतजार न करियो, इस बार घर नहीं आ पाऊंगा'

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गुरसेवक (28) के फौजी भाई हरदीप सिंह ने जब भाई के शहीद होने की सूचना घर पर दी, तो पूरा परिवार मर्माहत हो गया। एक अलग कमरे में अपने हाथों की मेहंदी और कलाइयों में पहनी सुहाग की चूडिय़ों को देखकर गुरसेवक पत्नी जसप्रीत कौर रोती-बिलखती रही। पड़ौसी औरतें उसे ढांढस बांधती रही, लेकिन बार-बार वे भी यही दोहराती रही कि ‘जल्दी लौटने का वायदा कर गया था गुरसेवक...अब कहां है, कोई तो बताए...।

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'मां...! मेरा इंतजार न करियो, इस बार घर नहीं आ पाऊंगा'

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गुरसेवक के पिता भी फौज और बड़ा भाई हरदीप भी फौज में थे। इसलिए गुरसेवक ने भी फौज में ही रहकर देश की सेवा करने की ठान ली थी। पिता ने सुच्चा सिंह ने बताया कि पांच साल और सात महीने पहले एयरफोर्स में ज्वाइनिंग पाई। बेटा बहुत दलेर था और किसी से डरता नहीं था। उसे बचपन से ही खतरनाक काम करने का शौकिन था। एयरफोर्स की गरुड़ कमांडो विंग का हिस्सा रहे गुरसेवक की जाबांजी को उनके अफसर भी बहुत सराहते थे।

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अपनी ड्यूटी में उसकी परफॉर्मेंस हमेशा आउट स्टैंडिंग रही। यही वजह रही थक जिस पद पर एयरफोर्स में अमूमन 6 साल बाद तरक्की मिलती थी, उस पद पर गुरसेवक महज साढ़े चार साल में ही पहुंच गया था। गुरसेवक को एक जांबाज और तेज तर्रार कमांडों समझा जाता था, इसलिए उसकी यूनिट ने पठानकोट में आतंकियों से लोहा लेने के लिए जिस कमांडों को टीम को तैयार किया था, उसमें गुरसेवक को भी शामिल किया गया था।

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