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ऑपरेशन ब्लू स्टार की नौबत आखिर क्यों आई, 19 क्लिक में पढ़िए पूरी कहानी

Wed, 07 Jun 2017 09:35 AM IST
amarujala.com- Presented by: खुशबू गोयल
amarujala.com- Presented by: खुशबू गोयल Updated Wed, 07 Jun 2017 09:35 AM IST
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operation blue star golden temple amritsar anniversary 6 june 1984
Operation Blue Star
आज ऑपरेशन ब्लू स्टार की 33वीं बरसी है। इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं वे सभी कारण, जिन्होंने इंदिरा गांधी सरकार को ऑपरेशन ब्लू स्टार करने पर मजबूर किया।
operation blue star golden temple amritsar anniversary 6 june 1984
Operation Blue Star
6 जून 1984 के दिन सिखों के सबसे पावन स्थल स्वर्ण मंदिर परिसर में भारतीय सेना की कार्रवाई 'ऑपरेशन ब्लूस्टार ने दुनिया भर में सुर्खियों में रही। आज भी लोग इसे याद करके सिहर उठते हैं। मामला 1970 के दशक के अंत में अकाली राजनीति में खींचतान और अकालियों की पंजाब संबंधित मांगों को लेकर शुरू हुआ था। 1978 में पंजाब की मांगों पर अकाली दल ने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पारित किया।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
इसके मूल प्रस्ताव में सुझाया गया था कि भारत की केंद्र सरकार का केवल रक्षा, विदेश नीति, संचार और मुद्रा पर अधिकार हो जबकि अन्य सब विषयों पर राज्यों के पास पूर्ण अधिकार हों। वे ये भी चाहते थे कि भारत के उत्तरी क्षेत्र में उन्हें स्वायत्तता मिले। अकालियों की प्रमुख मांगें थीं-चंडीगढ़ पंजाब की ही राजधानी हो, पंजाबी भाषी क्षेत्र पंजाब में शामिल किए जाएं, नदियों के पानी के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय की राय ली जाए।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
विश्लेषकों के मुताबिक इंदिरा गांधी की सरकार ने तीन बार मसला सुलझाने के लिए बात की थी। इसके साथ वे यह भी चाहते थे कि 'नहरों के हेडवर्क्स' और पन-बिजली बनाने के मूलभूत ढाँचे का प्रबंधन पंजाब के पास हो, फ़ौज में भर्ती क़ाबिलियत के आधार पर हो और इसमें सिखों की भर्ती पर लगी कथित सीमा हटाई जाए और अखिल भारतीय गुरुद्वारा क़ानून बनाया जाए।
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ऑपरेशन ब्लू स्टार
इस बीच अकाली कार्यकर्ताओं और निरंकारियों के बीच अमृतसर में 13 अप्रैल 1978 को हिंसक झड़प हुई। इस घटना को पंजाब में चरमपंथ की शुरुआत के तौर पर देखा जाता है। विश्लेषक मानते हैं कि शुरुआत में सिखों पर अकाली दल के प्रभाव को कम करने के लिए कांग्रेस ने सिख प्रचारक जरनैल सिंह भिंडरावाले को परोक्ष रूप से प्रोत्साहन दिया। उनका मानना है कि कांग्रेस का मकसद था कि अकालियों के सामने सिखों की मांगें उठाने वाले किसी संगठन या व्यक्ति को खड़ा किया जाए, जो उनको मिलने वाले समर्थन में सेंध लगा सके।

 
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