फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   nobel prize winner kailash satyarthi bharat yatra in chandigarh

पाखंडी बाबाओं पर कैलाश सत्यार्थी बोले- ऐसे बाबा अंत में जेल में ही मिलते हैं

Sat, 14 Oct 2017 09:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 14 Oct 2017 09:03 AM IST
विज्ञापन
nobel prize winner kailash satyarthi bharat yatra in chandigarh
पाखंडी बाबाओं पर कैलाश सत्यार्थी बोले
बचपन बचाने के लिए भारत यात्रा पर निकले नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी वीरवार को पंजाब यूनिवर्सिटी पहुंचे। सत्यार्थी ने मंच से बुलंद आवाज में युवाओं से कहा कि तुम लोगों को आजाद भारत इसलिए नहीं दिलाया कि बेटियों की दुर्गति करो। आजादी हमें ऐसे दिन देखने के लिए नहीं मिली है। 
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में दस साल की बच्ची से रेप और उसके मां बनने की घटना को चुप्पी और पुरानी मानसिकता का एक घिनौना सच बताया। उन्होंने कहा कि बच्ची की आवाज को मां-बाप ने दबाए रखा। क्योंकि उनकी मानसिकता ऐसी थी। अपनों ने ही बच्ची की यह हालत कर दी तो मां-बाप ने बजाए आवाज उठाने के समाज केडर से उसे दबा दिया। सत्यार्थी ने कहा कि एक बात सभी जान लें, इज्जत उसकी लुटती है, जो ऐसी घिनौनी हरकत करते हैं।
विज्ञापन


डर से लाखों भक्त बनाने वाले बाबा जेल में मिलते हैं
सत्यार्थी ने धर्म के नाम पर शोषण करने वालों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि डर से लाखों भक्तों की भीड़ जुटाने वाले बाबा अंत में जेल में ही मिलते हैं। ऐसे धार्मिक पाखंडियों से बेटियों को बचाने की जरूरत है। मेरी लड़ाई चुप्पी और पुरानी मानसिकता के खिलाफ है। सत्यार्थी ने कहा कि वे चुप नहीं रहेंगे। गुस्सा आता है लेकिन हिंसा नहीं करेंगे। गुस्से को अपना हथियार बनाएंगे ताकि जिस भारत का सपना देखा है, उसे पूरा कर सकूं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जब इज्जत बचेगी, तब मंदिरों और मस्जिदों के सही मायने हैं

nobel prize winner kailash satyarthi bharat yatra in chandigarh
भारत यात्रा पर निकले नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी
जब इज्जत बचेगी, तब मंदिरों और मस्जिदों के सही मायने हैं
कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि मंदिर, मस्जिद और गिराजाघर केसही मायने तब हैं, जब बेटियों की इज्जत सुरक्षित रहेगी। इसका कोई फायदा नहीं है कि बाहर बेटियों की इज्जत लुट रही हो और धर्म के दरवाजे बंद हो। उन्होंने कहा कि भारत यात्रा में सभी का सहयोग मिल रहा है।

सभी धर्म केअनुयार्यी, पार्टियों केनेता, हिंदूवादी संगठन, सच्चे नेता उनकेसाथ इस मंच पर हैं। धर्म के अनुयायी ऐसे हो जो खुले मंच से कहें कि यौन शोषण के दोषियों को उनके धर्म में शामिल नहीं किया जाएगा। यह भारत यात्रा मंदिरों में भी रुकी और मस्जिदों में भी। यह कोई धर्म की लड़ाई नहीं है। बल्कि बचपन को बचाकर नये भारत केलिए लड़ाई है।

बच्चों को भौतिक सुविधा नहीं प्यार चाहिए
सत्यार्थी ने मुंबई का किस्सा सुनाया। बड़े अफसर दंपति के13 साल केबेटे ने जहर खाकर जान दे दी। मां-बाप मानने को तैयार नहीं, क्योंकि वे अपने बेटे की सभी जरूरतें पूरी करते थे। पुलिस जांच में पता चला कि बच्चा चार माह से उसकेचार रिश्तेदारों द्वारा दरिंदगी का शिकार बनाया जा रहा था। इसलिए उसने अपनी जान दे दी। सत्यार्थी ने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ था कि क्योंकि लग्जरी जरूरतें पूरी करने वाले उस बच्चे केमां-बाप केपास बेटे को प्यार देने का समय नहीं था। कभी उसकेपास बैठकर उसे जाना ही नहीं।

सत्यार्थी ने बताया कड़वा सच

nobel prize winner kailash satyarthi bharat yatra in chandigarh
भारत यात्रा पर निकले नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी
सत्यार्थी ने बताया कड़वा सच
सत्यार्थी ने भारत में बाल शोषण अपराध केआंकड़ों के बारे में बताया कि हर एक घंटे में दो बच्चे यौन शोषण का शिकार होते हैं। उन्होंने कहा कि मैं एक घंटे से यहां बोल रहा हूं, यानि दो बच्चे भेड़ियों का शिकार बन चुके होंगे।
- मेरे भाषण केदौरान आठ बच्चे चोरी हो चुके होंगे।
- चोरी किया गया एक बच्चा जानवर से भी कम कीमत में बेच दिया जाता है।
- 70 फीसदी बाल शोषण केमामलों में ‘अपने’ ही बचपन नोचते हैं।
- 10 साल पहले 100 में से 53 बच्चे शोषण का शिकार होते थे। उस सरकारी रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया गया। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed