नवजोत सिंह सिद्धू अभी जेल से बाहर नहीं आना चाहते हैं। अगर सिद्धू चाहें तो उन्हें पैरोल मिल सकती है। मगर उन्होंने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई है। दरअसल, नवजोत सिंह सिद्धू 1988 के रोड रेज मामले में पटियाला की केंद्रीय जेल में एक साल की कैद काट रहे हैं। हाल ही में पटियाला जेल प्रशासन ने नवजोत सिंह सिद्धू को सूचना दी है कि वह पैरोल के योग्य हैं।
Navjot Sidhu: अभी जेल से बाहर नहीं आना चाहते सिद्धू! करीबियों ने पूछा तो कही बड़ी बात
अगर उनकी इच्छा है तो वह कुछ समय के खातिर पैरोल पर बाहर जा सकते हैं। मगर नवजोत सिंह सिद्धू पैरोल लेने के मूड में नहीं हैं। जेल में सिद्धू से मिलने जाने वाले करीबियों का कहना है कि सिद्धू कहते हैं कि उनकी किस्मत में यह सजा लिखी थी, सो उन्हें मिल गई। यह रब की मर्जी थी, इसलिए वह सजा काटकर ही बाहर आएंगे।
जन्मदिन पर अचानक बिगड़ गई थी तबीयत
59वें जन्मदिन पर पटियाला जेल में नवजोत सिंह सिद्धू की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्होंने राजिंदरा अस्पताल ले जाया गया था। बताया गया कि सिद्धू का ब्लड प्रेशर कम हो गया, जिस वजह से वह बेहोश हो गए। सिद्धू के वकील एचपीएस वर्मा के मुताबिक सिद्धू को पहले कभी बीपी की शिकायत नहीं रही। रोजाना की तरह बुधवार को भी उन्होंने सुबह नाश्ते में फल लिए लेकिन अचानक करीब साढ़े 11 बजे वह बेहोश हो गए। जांच करने पर ब्लड प्रेशर कम पाया गया था।
घुटनों में दर्द की वजह से मिली है खाट
नवजोत सिंह सिद्धू के घुटनों के जोड़ों में तेज दर्द की शिकायत की है। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें वजन कम करने, घुटनों की कसरत की सलाह दी थी। डॉक्टर ने उन्हें फर्श के बजाय बेड पर सोने की सलाह दी थी। यह भी कहा गया कि अगर सलाह नहीं मानी तो यह समस्या बढ़ सकती है। डॉक्टर की सलाह के बाद जेल प्रशासन ने सिद्धू को लकड़ी की खाट मुहैया कराई है।
34 साल पुराने मामले में काट रहे सजा
नवजोत सिंह सिद्धू 34 साल पुराने रोड रेज मामले में एक साल की सजा काट रहे हैं। दरअसल, 1988 में नवजोत सिंह सिद्धू अपने दोस्त रुपिंदर सिंह संधू के साथ पटियाला के शेरांवाला गेट स्थित मार्केट में गए थे। वहां पार्किंग में उनकी एक 65 साल के बुजुर्ग गुरनाम सिंह के साथ कहासुनी हो गई थी। इस दौरान सिद्धू ने बुजुर्ग को घुटने से मारकर गिरा दिया था। आनन-फानन बुजुर्ग को अस्पताल ले जाया गया, जहां पर हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई थी। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को महज 1000 रुपये के जुर्माने के साथ छोड़ दिया था। मगर इसी साल 20 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक साल की सजा सुनाई। इसके बाद से ही सिद्धू पटियाला जेल में अपनी सजा काट रहे हैं।