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50 जानें बचाकर खुद शहीद, राष्ट्रपति ने मां को दिया शौर्यचक्र
गुरदीप सोढी/अमर उजाला, यमुनानगर
Updated Fri, 13 May 2016 12:58 PM IST
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हरियाणा के यमुनानगर का लाल रॉकी ऊधमपुर में शहीद
- फोटो : अमर उजाला
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उधमपुर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हुए बीएसएफ के जवान रॉकी ने अपने प्राणों के बलि देकर अपने 60 साथियों की जान बचाई थी। राष्ट्रपति से मिला शौर्यचक्र।
हरियाणा के यमुनानगर का लाल रॉकी ऊधमपुर में शहीद
- फोटो : अमर उजाला
यमुनानगर जिले के गांव रामगढ़ माजरा के शहीद रॉकी की मां अंग्रेजो देवी को बेटे की शहादत के बाद राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया है। सात मई को दिल्ली में आयोजित अलंकार समारोह में अंग्रेजो देवी को शौर्य चक्र प्रदान किया गया। बेटे की शहादत पर शौर्य चक्र लेकर दिल्ली से लौटीं शहीद रॉकी की मां अब बेटी के साथ वीरता चक्र पाना चाहती हैं। उनका कहना है कि स्वयं वीरता पुरस्कार पाने की खुशी अलग है। बेटे की शहाद पर मिली इस अधूरी खुशी को अपनी बेटी को फौज में भेज कर पूरा करना चाहती है।
हरियाणा के यमुनानगर का लाल रॉकी ऊधमपुर में शहीद
- फोटो : अमर उजाला
गांव रामगढ़ माजरा गांव का रॉकी 5 अगस्त 2015 को उधमगढ में शहीद हुआ था। रॉकी वर्ष 2012 में बीएसएफ में भर्ती हुआ था। उसकी उम्र करीब 25 वर्ष थी। उसके पिता शीशपाल छोटे किसान है। रॉकी का एक बड़ा भाई और रॉकी से छोटी बहन है। रॉकी को शौर्य चक्र मिलने से परिवार के अलावा गांव के लोग काफी खुश है। शहीद रॉकी की मां अंग्रेजो देवी, भाई रोहित, मासी सीमा के अलावा महिला थाने की इंस्पेक्टर कुलबीर कौर व हेड कांस्टेबल जसविंद्र कौर दिल्ली गए थे।
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हरियाणा के यमुनानगर का लाल रॉकी ऊधमपुर में शहीद
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि उधमपुर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हुए बीएसएफ के जवान रॉकी ने अपने प्राणों के बलि देकर अपने साथियों की जान बचाई थी। बीएसएफ के करीब 50 जवान बस में सवार होकर जम्मू से कश्मीर जा रहे थे। जम्मू से करीब 50 किलोमीटर दूर पहुंचने पर अचानक एक आतंकवादी बस के सामने आ गया और उसने बस की ओर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दी। रॉकी चालक के बगल की सीट पर बैठा हुआ था। आंतकवादी द्वारा चलाई गई गोली चालक के साथ-साथ रॉकी को भी लगी।
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हरियाणा के यमुनानगर का लाल रॉकी ऊधमपुर में शहीद
- फोटो : अमर उजाला
बुरी तरह घायल होने के बावजूद रॉकी ने बस में चढने का प्रयास कर रहे आतंकवादी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। मारे गए आतंकवादी के पास हैंड ग्रेनेड भी था। यदि आतंकवादी बस में चढ़ने में सफल हो जाता तो कई जवानों की जान जा सकती थी। रॉकी की शहादत के बाद बिलासपुर खंड का छोटा सा गांव रामगढ का माजरा देश भर में चर्चित हो गया था। रामगढ़माजरा निवासी रॉकी की शहादत के नौ माह बाद भी परिजनों को पेंशन नहीं मिल रही है। शहीद रॉकी के पिता प्रीतपाल भाई रोहित का कहना है कि उन्हें अभी तक बेटे की पेंशन मिलना शुरू नहीं हुई है।