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एसेसमेंट के लिए सरकारी कर्मचारियों ने चक्कर कटवाए तो युवक ने ऐसे लिया बदला, देखिए तस्वीरें
Wed, 24 Jun 2020 09:37 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, फतेहाबाद
अमर उजाला, फतेहाबाद
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 24 Jun 2020 09:37 AM IST
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सिक्के गिनते नगर परिषद कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
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मकान की एसेसमेंट लेने के लिए नगर परिषद कर्मचारियों द्वारा एक व्यक्ति को कई महीने तक चक्कर कटवाए गए तो व्यक्ति ने इसका सबक सिखाने के लिए अनूठा तरीका अपनाया। देखिए तस्वीरें...
सिक्के गिनते नगर परिषद कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के फतेहाबाद जिले की नगर परिषद में यह रोचक मामला सामने आया है। व्यक्ति द्वारा अपनाए गए तरीके के चलते नगर परिषद कर्मचारी सारा दिन एक-एक रुपये के सिक्के गिनते रह गए। मिली जानकारी के अनुसार, डीसी कॉलोनी निवासी सुनील कुमार की भाभी का मकान विचाराश्रम मंदिर के पास है और उसने इस मकान की एसेसमेंट निकलवाने के लिए नगर परिषद कार्यालय में आवेदन दिया था।
सिक्के गिनते नगर परिषद कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
लेकिन नगर परिषद कर्मचारियों ने उसे बार-बार चक्कर कटवाए और उससे पैडिंग प्रॉपर्टी टैक्स के 90 हजार रुपये भरवा लिए। सुनील ने बताया कि उसकी भाभी का मकान रिहायशी है, लेकिन नप कर्मचारियों ने इसे कॉमर्शियल बिल्डिंग में शामिल करके इसका प्रॉपर्टी टैक्स 90 हजार रुपये दिखा दिया। मजबूरी के चलते उसने ये फीस जमा करवा दी। इस बीच लॉकडाउन के दौरान जब वो दोबारा अपना आवेदन लेकर गया तो नगर परिषद कर्मचारियों ने उसे एक नोटिस थमा दिया।
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सिक्के गिनते नगर परिषद कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
इस नोटिस में साल 2020 का प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में नौ हजार रुपये भरने के निर्देश थे, जबकि अभी तक साल 2020 खत्म ही नहीं हुआ है। इसके चलते उसने नगर परिषद कर्मचारियों को सबक सिखाने की सोची। उसने इधर उधर से एक-एक और दो-दो रुपये के सिक्के इकट्ठा किए और उसे एक थैले में भरकर नगर परिषद कार्यालय में पहुंच गया। जब नप कर्मचारियों ने उससे फीस मांगी तो उसने सिक्कों से भरा थैला नप कर्मचारियों की टेबल पर रख दिया।
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सिक्के गिनते नगर परिषद कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
इतने सिक्के देखकर एकबारगी तो नप कर्मचारियों के पसीने छूट गए। चूंकि वो सिक्कों के रूप में फीस लेने से इंकार नहीं कर सकते तो तीन कर्मचारियों की डयूटी लगाई गई, जो सिक्के गिनेंगे। तकरीबन तीन-चार घंटे तक सिक्कों को गिनने के बाद सुनील की फीस जमा करवाई गई। सुनील कुमार का कहना था कि वो सामान्य रुपयों में भी फीस जमा करवा सकता था, लेकिन जिस तरह से बार-बार उसे चक्कर कटवाए गए, उससे परेशान होकर उसने ये कदम उठाया।