आपने जो मोबाइल चार्जर खरीदा है, वो कभी भी धोखा दे सकता है, भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है तो संभल जाएं और ऐसे करें असली-नकली की पहचान।
आजकल, चार्जर के काम न करने, फोन चार्ज न करने, फोन खराब होने, फोन ब्लास्ट होने की खबरें आती रहती हैं। ज्यादातर मामलों में ऐसा मोबाइल चार्जर के कारण होता है, जो नकली हो सकता है। वैसे भी मार्केट में कई कंपनियों के चार्जर मौजूद हैं, जिन्हें आप खरीद लेते हैं, लेकिन वे कुछ ही दिन में खराब हो जाते हैं।
ऐसे में आपको पता होना चाहिए कि असली चार्जर कौन सा है और नकली चार्जर कौन सा। इसके मद्देनजर हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे टिप्स, जिन्हें ध्यान में रखकर असली नकली चार्जर की पहचान कर सकते हैं और फोन को खराब होने से बचा सकते हैं।
असली और नकली चार्जर के बीच फर्क बहुत बारीक होता है। जैसे चार्जर के प्रिंटेड मैटर में अगर 'ए+' और 'मेड इन चाइना' लिखा है, तो वह नकली है। साथ ही असली चार्जर की पिन का बेस (सफेद भाग) नीचे मोटा, और ऊपर पतला है, जबकि नकली चार्जर में बराबर होता है।
असली चार्जर के अडैप्टर पर प्रिंटेड मैटर सेमी ट्रांसपरेंट होता है, जबकि नकली में यह गहरी काली इंक से प्रिंट होता है। असली चार्जर में डिजाइन्ड बाय कैलिफोर्निया लिखा होगा। चार्जर की केबल अगर 120 सेंटीमीटर से कम है, अडैप्टर की किनारे शार्प नहीं है और इसका साइज भी नॉर्मल अडैप्टर से बड़ा है तो चार्जर नकली है।